थॉमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:हैकिंग को रूटीन बना देना एआई की "बुद्धिमत्ता' नहीं कहला सकती
एआई कम्पनी एंथ्रोपिक ने हाल ही में अपने लार्ज लैंग्वेज मॉडल की नवीनतम सेवा क्लॉड माइथोस प्रिव्यू को जारी किया, लेकिन यह केवल 40 बड़ी टेक-कंपनियों के सीमित समूह के लिए होगा। यह नया मॉडल परफॉर्मेंस में बुनियादी बदलावों का दावा करता है, जिसके साइबर और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरे प्रभाव हो सकते हैं। क्लॉड माइथोस के डेवलपमेंट के दौरान एंथ्रोपिक ने पाया कि यह न केवल किसी भी मॉडल की तुलना में अधिक जटिलता और आसानी से सॉफ्टवेयर कोड लिख सकता है, बल्कि अपनी इस क्षमता के चलते यह दुनिया के लगभग सभी प्रमुख सॉफ्टवेयर सिस्टमों में व्याप्त कमजोरियों को भी पहले की तुलना में अधिक आसानी से खोज सकता है। लेकिन अगर यह टूल गलत हाथों में चला गया, तो वे दुनिया के लगभग हर प्रमुख सॉफ्टवेयर सिस्टम- यहां तक कि इस समूह में शामिल कंपनियों द्वारा बनाए सिस्टमों को भी हैक कर सकते हैं। यह कोई पब्लिसिटी-स्टंट नहीं है। इस घोषणा से पहले, प्रमुख टेक-कंपनियों के प्रतिनिधि ट्रम्प प्रशासन के साथ निजी तौर पर इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि इसका उन देशों की सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा, जो इन असुरक्षित सॉफ्टवेयर प्रणालियों का उपयोग करते हैं। एंथ्रोपिक ने अपने एक लिखित बयान में कहा कि पिछले केवल एक महीने में ही माइथोस प्रिव्यू ने हजारों गंभीर कमजोरियों की पहचान की है। ये हर प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में शामिल हैं। एआई जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसके मद्देनजर ऐसी क्षमताओं का व्यापक होना अब दूर नहीं है। और संभव है कि वे उन पक्षों से भी आगे फैल जाएं, जो इन्हें सुरक्षित रूप से उपयोग करने की बात करते हैं। सुपर-इंटेलिजेंट एआई अपेक्षा से कहीं तेजी से सामने आ रहा है। यह तो पहले से स्पष्ट था कि एआई किसी भी व्यक्ति- चाहे उसकी कम्प्यूटर साक्षरता का स्तर कुछ भी हो- को सॉफ्टवेयर कोड लिखने में असाधारण रूप से सक्षम बना रहा है। लेकिन बताया जाता है कि स्वयं एंथ्रोपिक ने भी यह अनुमान नहीं लगाया था कि यह इतनी जल्दी, इतनी दक्षता के साथ, मौजूदा कोड में खामियों को खोजने और उनका दोहन करने के तरीकों को पहचानने में सक्षम हो जाएगा। क्लॉड माइथोस ने हर प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में गंभीर कमजोरियों की पहचान की है- ये ऐसे सिस्टम हैं, जिन पर दुनिया भर में बिजली ग्रिड, जल आपूर्ति तंत्र, एयरलाइन आरक्षण प्रणालियां, रीटेलिंग नेटवर्क, सैन्य प्रणालियां और अस्पताल निर्भर हैं। यदि यह टूल व्यापक रूप से उपलब्ध हो जाता है, तो इसका अर्थ होगा कि किसी भी प्रमुख बुनियादी ढांचे की प्रणाली को हैक करने की क्षमता- जो पहले केवल निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों और खुफिया एजेंसियों तक सीमित थी और जो एक कठिन और महंगा कार्य था- अब हर आपराधिक तत्व, आतंकी संगठन, देश के लिए सुलभ हो सकती है। इस समस्या का समाधान दुनिया का कोई भी देश अकेले नहीं कर सकता। शुरुआत दो एआई महाशक्तियों- अमेरिका और चीन को करनी होगी। यह बहुत जरूरी हो गया है कि वे आपस में सहयोग करना सीखें, ताकि बुरी ताकतें इस साइबर क्षमता तक पहुंच न बना सकें। यह उतना ही बुनियादी महत्व का है, जितना एटमी हथियारों के बाद परमाणु अप्रसार संधियां थीं। जटिल साइबर हैकिंग अभियानों को विकसित करने की जो क्षमता पहले बड़े देशों, सेनाओं, कंपनियों और बड़े बजट वाले आपराधिक संगठनों तक सीमित थी, वह अब छोटे समूहों को भी उपलब्ध हो सकती है। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे केवल जिम्मेदार हाथों तक ही सीमित रहें। (द न्यूयॉर्क टाइम्स से)