पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:अवकाश अवश्य मनाएं पर इन चार बातों का ध्यान रखें
बच्चों की स्कूलों की छुट्टियां लग चुकी हैं या लग रही हैं। अधिकांश पैरेंट्स बच्चों को लेकर यात्रा पर निकलने की तैयारी में हैं। ऋषि-मुनि भी अवकाश अर्जित करते थे। छुट्टियां मनाने का उनका अपना ढंग था, क्योंकि गुरुकुल व्यवस्था थी। जब आप अवकाश का मन बनाएं तो सबसे पहले समय-सीमा तय करें। सहयोगी कौन रहेंगे? क्षेत्र बदले तो सावधानी रखिए। पुराना स्थान छोड़ा है तो वहां से संपर्क कितने समय रखना है, इसमें सचेत रहें। और सबसे बड़ी बात, सकुशल लौटें। अवकाश का सदुपयोग कैसे हो, इस पर रामचरितमानस में एक पंक्ति आई है। राम जी, सीता जी और लक्ष्मण वन के समय एकांत में अवकाश ही मना रहे थे। तो पंक्ति है- एहि बिधि गए कछुक दिन बीती, कहत बिराग ज्ञान गुन नीति। कुछ दिन ऐसे बीते कि उन्होंने एक-दूसरे से वैराग्य, ज्ञान, गुण और नीति पर चर्चा की। अवकाश मनाएं, पर ये चार बातें इस दौरान होती रहें तो मानसिक स्वास्थ्य के साथ जाएंगे, शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मनाएंगे और दोनों के साथ ही लौटेंगे।