पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:मेलजोल और अपनापन भी एक तरह की देशसेवा है
राजनीतिक दल एक-एक करके हमारे देश के प्रदेशों पर खूब काम कर रहे हैं। सरकारें बदल गईं, नई-नई योजनाएं रूप ले रही हैं। हर प्रदेश प्रमुख का दावा है कि हमने श्रेष्ठ कर दिया, लेकिन अब प्रदेश के साथ-साथ समाज और परिवार पर भी काम करने का समय आ गया। हमारे भारत देश को आने वाले समय में जिस कठिनाई का सामना करना है, उसमें हमारी ताकत हमारा परिवार और समाज है। कोई 16-17 साल पहले यह दुनिया एक कठिन आर्थिक दौर से गुजरी थी। हमारे शीर्षस्थ राजनेताओं ने संकेत कर दिया है- बुरे दिन आने वाले हैं। ऐसे में परिवार और समाज की भूमिका हमें और दृढ़ करनी पड़ेगी। अगर हम समाज और परिवार में केवल एक खतरनाक बदलाव पर ध्यान दें और उसमें सुधार करें तो भी देशसेवा बहुत बड़ी हो जाएगी और वो है- अकेलापन। तो अपने घर के सदस्यों के साथ और अपने निवास स्थान में पड़ोसियों के साथ अत्यधिक मेलजोल, अपनापन बनाए रखिएगा। अगर हम इतना करते हैं तो ये भी एक देशसेवा होगी।