पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:युवाओं के "शंकर-दूत' बनने का समय आ गया है

Apr 29, 2026 - 06:08
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:युवाओं के "शंकर-दूत' बनने का समय आ गया है
जिस धर्म की छाया में हम सुरक्षित, समन्वित और सानंद हैं, यह आदिगुरु शंकराचार्य जी द्वारा दी गई स्थिति है। पिछले दिनों नर्मदा तट पर एक अनूठा अनुष्ठान हुआ। विभिन्न क्षेत्रों के उच्च शिक्षित युवक अद्वैत वेदांत के शंकर-दूत के रूप में दीक्षित हुए। यह दृश्य तो निराला था ही, इसके पीछे का उद्देश्य भविष्य के लिए बड़ा संदेश बन गया। इस अवसर पर अवधेशानंद गिरि जी ने कहा कि भारत का दर्शन वैश्विक मंच पर प्रभावी रूप में प्रस्तुत किया जाए। उनके इस आशीर्वचन में ‘प्रभावी’ शब्द बड़ा महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ है कि इस दर्शन को अब हल्के में ना लिया जाए। सांख्यिकी की दृष्टि से देश में युवाओं की संख्या 2018 से 2035 तक बहुत अच्छे ढंग से बढ़ेगी। इस दौर में बाल कुपोषण की तो चर्चा हुई, जिसका संबंध उदर से है। पर युवा कुपोषण, जिसका संबंध उर यानी हृदय से है, उस पर अभी बचे 8 साल में काम होना चाहिए। और अवधेशानंद जी जो बात कह रहे हैं ‘प्रभावी ढंग से’, वो यही है। युवाओं के शंकर-दूत बनने का समय आ गया। धर्म और विज्ञान को नया रूप देने का ही यह अनुष्ठान था।