मनोज जोशी का कॉलम:ट्रम्प को चीन से कोई "बिग ब्यूटीफुल डील' नहीं मिलेगी

May 13, 2026 - 06:10
मनोज जोशी का कॉलम:ट्रम्प को चीन से कोई "बिग ब्यूटीफुल डील' नहीं मिलेगी
ट्रम्प और शी जिनपिंग की मुलाकात जल्द ही बीजिंग समिट में होगी। अपने दूसरे कार्यकाल में ट्रम्प की यह पहली चीन यात्रा होगी। इससे पहले, अक्टूबर 2025 में दोनों नेता दक्षिण कोरिया के बुसान में मिले थे। पहले कार्यकाल में ट्रम्प ने चीन के साथ अमेरिका के दशकों पुराने जुड़ाव को खत्म कर दिया था। एक साल तक दोनों देशों के बीच चले टैरिफ युद्ध के बाद अब ट्रम्प की इस यात्रा का उद्देश्य शायद दोनों देशों के बीच रिश्तों को फिर से बहाल करना है। चीन से अमेरिका के पुराने रिश्ते इस भ्रम पर आधारित थे कि पश्चिमी देशों के साथ आर्थिक जुड़ाव चीन को अधिक खुला और लोकतांत्रिक बनाएगा। लेकिन नया रिश्ता ऐसे चीन से निपटने की व्यावहारिक जरूरत है, जो पूरी तरह कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण में है और एक आर्थिक तथा तकनीकी महाशक्ति बन चुका है। नि:संदेह, शानो-शौकत और दिखावे के शौकीन ट्रम्प का चीन में बेहद भव्य स्वागत होगा। कुछ प्रतीकात्मक कदम और कारोबारी समझौते हो सकते हैं। लेकिन जोर प्रतिस्पर्धा खत्म करने पर नहीं, उसे मैनेज करने पर ही रहेगा। बुसान में शी-ट्रम्प के बीच हुए टैरिफ समझौते को आगे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन तकनीकी, सुरक्षा और भू-राजनीतिक प्रभाव के क्षेत्रों में दोनों देशों की प्रतिद्वंद्विता में कोई बदलाव नहीं आएगा। चीन के लिए ताइवान अहम प्राथमिकता है। पिछले साल ट्रम्प ताइवान के लिए 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज की मंजूरी दे चुके हैं। लगभग 14 अरब डॉलर के अन्य पैकेज भी प्रक्रियाधीन हैं, जिनमें अत्याधुनिक मिसाइलें शामिल हैं। चीन ने अमेरिका को कहा था कि वह ताइवान को हथियार बेचने के मुद्दे पर सावधानी बरते। इसी बीच, ताइवान की विपक्षी पार्टी केएमटी की चेयरपर्सन चेंग ली-वुन की चीन में शी से हालिया मुलाकात यह संकेत देती है कि ताइवान को लेकर चीन के पास सैन्य विकल्पों के अलावा और भी रास्ते हैं। शी-ट्रम्प बैठक का सबसे संभावित नतीजा यही होने वाला है कि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख दोहराएंगे और मतभेदों पर परदा डालने की कोशिश करेंगे। फिर ये बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब ईरान युद्ध का असर पूरी दुनिया पर है और दोनों नेताओं की मुलाकात तक इसके समाप्त होने की संभावना भी नहीं दिख रही। निश्चित ही बातचीत में ईरान बड़ा विषय रहेगा, क्योंकि वह चीन का करीबी साझेदार है और उसके तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन में ही जाता है। ट्रम्प शायद चीन पर दबाव बनाएंगे कि वह होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान को राजी करे। वैसे भी चीन इसका समर्थन करता है। चीन भी इसे इस नजरिए से देखेगा कि ईरान मसले ने अमेरिका का ध्यान पूर्वी एशिया से हटा दिया है। कई विश्लेषक पहले ही क्वाड की घटती प्रासंगिकता की ओर इशारा कर चुके हैं। 2025 में क्वाड का कोई समिट नहीं हुआ और कब होगा, यह भी तय नहीं। हालांकि, इसी माह के अंत में क्वाड देशों की बैठक नई दिल्ली में होने वाली है। हाल ही एक पोस्ट में ट्रम्प ने इस यात्रा को लेकर उम्मीदों को अपने अंदाज में जाहिर किया। उन्होंने खुद ही ऐलान कर दिया कि होर्मुज स्ट्रेट खुलने से चीन बहुत खुश है। ट्रम्प ने लिखा, ‘मैं यह पूरी दुनिया के लिए और उनके लिए भी कर रहा हूं।’ उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने ईरान को हथियार नहीं भेजने पर सहमति जताई है। वैसे चीन के प्रति ट्रम्प की शत्रुता कम नहीं हुई है, लेकिन उनका अंदाज बदल गया है। धमकियां नाकाम होने पर अब वे दोस्ताना और सौदेबाजी वाला रवैया आजमा रहे हैं। ट्रम्प अपनी शैली के मुताबिक इस समिट को एक शानदार जीत के रूप में पेश करना चाहेंगे, जिसमें कोई ‘बिग ब्यूटीफुल डील’ हो जाए। लेकिन चीन समझदार है और शायद ही उन्हें उनकी उम्मीदों के मुताबिक कोई बड़ी डील देगा। चीन के प्रति ट्रम्प की शत्रुता कम नहीं हुई है, लेकिन उनका अंदाज बदल गया है। धमकियां नाकाम होने पर अब वे दोस्ताना और सौदेबाजी वाला रवैया आजमा रहे हैं। ट्रम्प शी जिनपिंग के साथ समिट को एक शानदार जीत के रूप में पेश करना चाहेंगे। (ये लेखक के अपने विचार हैं)