Home अंतर्राष्ट्रीय ख़बरें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए युग में ज्ञान आधारित उपनिवेशीकरण से बचने के लिए सरकारों को पारदर्शी एवं मानवीय फ्रेमवर्क बनाने की जरूरत- डॉ डीपी शर्मा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए युग में ज्ञान आधारित उपनिवेशीकरण से बचने के लिए सरकारों को पारदर्शी एवं मानवीय फ्रेमवर्क बनाने की जरूरत- डॉ डीपी शर्मा

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नए युग में ज्ञान आधारित उपनिवेशीकरण से बचने के लिए सरकारों को पारदर्शी एवं मानवीय फ्रेमवर्क बनाने की जरूरत- डॉ डीपी शर्मा

सेंट्रल इथोपिया के वाचेमो विश्वविद्यालय में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में की-नोट स्पीच देने के लिए कंप्यूटर वैज्ञानिक एवं अंतरराष्ट्रीय डिजिटल डिप्लोमेट प्रोफेसर डीपी शर्मा सेंट्रल इथोपिया की राजधानी होयसेना पहुंचे।

विश्वविद्यालय पहुंचने पर डॉ शर्मा ने देखा कि भारत और इथोपिया के संबंधों की प्रगाढ़ता को दर्शाने हेतु भारतीय तिरंगे के को भी स्वागत स्थल पर लगाया गया।
कॉन्फ्रेंस के स्वागत भाषण में बोलते हुए विश्वविद्यालय के अध्यक्ष कुलपति डॉ दावित हैईसो ने कहा कि दुनियां तेजी से बदल रही है और ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग समाज की प्रगति और उसके विकास में समान रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उद्घाटन सत्र में बोलते हुए डॉ हैईसो ने कहा कि विश्वविद्यालय वैज्ञानिक एवं डिजिटल डिप्लोमेसी विशेषज्ञ हिज ऐक्सीलेंसी डॉ डीपी शर्मा के विचारों को सुनने के लिए उत्सुक है।


इस अवसर पर इथोपिया की परंपरागत वेशभूषा (खादी से बने हुए कोट एवं सॉल) पहना कर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ दावित हैईस ने डॉ शर्मा को सम्मानित किया।
प्रमुख वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ शर्मा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनियां के दो पहलू हैं। एक पहलू जो हमें 180 डिग्री पर दिखाई दे रहा है एवं जिसे हम पूरी तरीके से दोहन कर इस तकनीक का फायदा उठाने के लिए आतुर हैं तो वहीं एक दूसरा पहलू वह है जो 180 डिग्री पर हमें दिखाई नहीं दे रहा यानी वह एक डार्क जोन है‌ जो टेक्नोलॉजिकल सिंगुलेरिटी के मार्ग पर जाता है जहां से लौटना मुश्किल है और आगे का रास्ता मानव सभ्यता से के लिए चुनौतियों से भरा हुआ है। इसमें सबसे बड़ी चुनौती दुनियां के दो ध्रुवों को संतुलित की है जहां पर कम ज्ञान वाले लोग अधिक ज्ञान वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मशीनों को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे मगर वे कर पाएंगे या नहीं यह भविष्य बताएगा। एक सबसे बड़ा खतरा है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युक्त कंपनियों और देशों के द्वारा ज्ञान आधारित उपनिवेशीकरण की व्यवस्थाएं जिससे दुनिया को सावधान रहना होगा।


इस अवसर पर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ मंडेफ्रौत भी भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर प्रख्यात प्रोफेसर यिसाक ने एग्रीकल्चर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग कर विस्तार से चर्चा की और बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से प्रिसीजन एग्रीकल्चर की दुनियां में एक नए युग की शुरुआत हुई है

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