Home Uncategorized डॉ डीपी शर्मा (डिजिटल डिप्लोमेट) एवं डॉ बिरहानू बुल्चा (नासा वैज्ञानिक) युवाओं के लिए संयुक्त परियोजना पर काम करेंगे

डॉ डीपी शर्मा (डिजिटल डिप्लोमेट) एवं डॉ बिरहानू बुल्चा (नासा वैज्ञानिक) युवाओं के लिए संयुक्त परियोजना पर काम करेंगे

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अमेरिका, समोना राजाखेड़ा निवासी भारत के कंप्यूटर वैज्ञानिक एवं डिजिटल डिप्लोमेट डॉ डीपी शर्मा अब युवाओं के लिए एक विशेष वैज्ञानिक परियोजना पर काम करने जा रहे हैं जिसका उद्देश्य होगा युवाओं की विज्ञान और विज्ञान के युवा।
अभी हाल में डॉ शर्मा की मुलाकात वैज्ञानिकों एवं डिप्लोमेट्स के साथ एक्सपीरियंस शेयरिंग इवेंट फॉर टेक्नोलॉजी एंड डिप्लोमेसी के दौरान हुई जिसमें नासा के वैज्ञानिक डॉ बिरहानू बुल्चा भी थे। आपको बता दे कि डॉ बिरहानू बहुत ही युवा वैज्ञानिक हैं जिन्हें चंद्रमा पर पानी की खोज के लिए बनाए गए हाई पावर लेजर आधारित टिनी स्पेक्ट्रोमीटर के आविष्कारकर्ता के रूप में जाना जाता है। डॉ शर्मा से बातचीत करते हुए डॉ बिरहानु ने बताया कि गोडार्ड तकनीक से अब चंद्रमा पर पानी ढूंढना और आसान हो सकता है क्योंकि यह टिनी इंस्ट्रूमेंट जो उच्च शक्ति वाले टेराहर्ट्ज़ लेजर उत्पन्न करने के लिए क्वांटम टनलिंग नामक प्रभाव का उपयोग करता है, आज मौजूदा लेजर तकनीक में गैप(अंतर) को भी भरता है।

पृथ्वी के प्राकृतिक उपग्रह और सौर मंडल और उससे आगे की अन्य वस्तुओं की खोज के लिए पानी और अन्य संसाधनों का पता लगाना नासा की प्राथमिकता है। पिछले प्रयोगों से अनुमान लगाया गया था कि चंद्रमा पर थोड़ी मात्रा में पानी मौजूद है। हालाँकि, अधिकांश प्रौद्योगिकियाँ पानी, मुक्त हाइड्रोजन आयनों और हाइड्रॉक्सिल के बीच अंतर नहीं करती हैं, क्योंकि उपयोग किए जाने वाले ब्रॉडबैंड डिटेक्टर विभिन्न वाष्पशील पदार्थों के बीच अंतर नहीं कर सकते हैं।
दोनों वैज्ञानिकों ने आपसी सहयोग से दुनियां में विशेष रूप से एशिया एवं अफ्रीका के युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष से जोड़ने एवं अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने और मानव सभ्यता को और अधिक सुरक्षित, संरक्षित, शांतिमय एवं सुविधाजनक बनाने के लिए काम करने पर सहमति जताई।
डॉ शर्मा ने बताया कि एशिया एवं अफ्रीका के ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवा प्रतिभाएं पैदा होतीं हैं मगर समुचित मार्गदर्शन के अभाव में वे आगे नहीं बढ़ पातीं। डॉ शर्मा ने कहा कि यह जरूरी नहीं है की प्रतिमाएं सिर्फ शहरों में पैदा हों वे एशियाई या अफ्रीकी देश के ग्रामीण क्षेत्र में भी पैदा हो सकतीं हैं। याद रहे कि डॉ शर्मा एवं डॉ बिरहानु ग्रामीण परिवेश में पैदा हुए पले बढ़े और यहां तक पहुंचे।

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