Home करियर फार्मेसी शिक्षा और उद्योग के समन्वय से वैश्विक मानकों की दिशा – नई दिल्ली में कार्यशाला का आयोजन

फार्मेसी शिक्षा और उद्योग के समन्वय से वैश्विक मानकों की दिशा – नई दिल्ली में कार्यशाला का आयोजन

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फार्मेसी शिक्षा और उद्योग के समन्वय से वैश्विक मानकों की दिशा – नई दिल्ली में कार्यशाला का आयोजन

इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन (IPA) के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश्वर शर्मा ने जानकारी दी कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और भारतीय शिक्षण मंडल (BVM) के संयुक्त तत्वावधान में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन नई दिल्ली के नौरोजी नगर स्थित PCI के नवीन परिसर में किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य बी. फार्मा पाठ्यक्रम को उद्योग की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संरेखित करना था, साथ ही फार्मेसी शिक्षा को वैश्विक मानकों के साथ सामंजस्यपूर्ण दिशा प्रदान करना था। कार्यशाला के मुख्य अतिथि भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री बी.आर. शंकरानंद और मुख्य वक्ता इंडियन फार्मास्यूटिकल एलायंस (IPA) के महासचिव डॉ. सुदर्शन जैन थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोंटू कुमार पटेल ने की। इस अवसर पर देशभर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के फार्मेसी विशेषज्ञों के साथ-साथ भारतीय शिक्षण मंडल के विषय विशेषज्ञों ने भी सहभागिता की।

डॉ. मोंटू कुमार पटेल का संदेश
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. मोंटू कुमार पटेल ने कहा कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किफायती व प्रभावी चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने में फार्मासिस्टों की भूमिका अतुलनीय है। उन्होंने वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने, दवाओं के वितरण और रखरखाव, और उनकी किफायती व सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने में फार्मासिस्टों के योगदान पर जोर दिया। डॉ. पटेल ने यह भी कहा कि यह कार्यशाला फार्मेसी शिक्षा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संरेखित करने के साथ-साथ वैश्विक मानकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

श्री बी.आर. शंकरानंद का विचार
श्री बी.आर. शंकरानंद ने भारतीय शिक्षा दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ज्ञान छात्र के भीतर विद्यमान होता है और शिक्षक का कार्य उसे प्रज्वलित करना है। उन्होंने पाठ्यक्रम से अनुपयोगी विषयवस्तु को हटाकर पठन-पाठन की प्रभावी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने पर बल दिया। इसके साथ ही, उन्होंने शिक्षा और उद्योग के बीच समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि समग्र विकास संभव हो सके।

डॉ. सुदर्शन जैन का संदेश
डॉ. सुदर्शन जैन ने शिक्षकों को नवीनतम औद्योगिक कार्यप्रणालियों का प्रशिक्षण देने के महत्व को रेखांकित किया, ताकि वे छात्रों को उद्योग जगत की जरूरतों के अनुसार तैयार कर सकें। उन्होंने बताया कि इससे छात्रों का उद्योग में प्रभावी योगदान सुनिश्चित होगा और उनका भविष्य उज्जवल बनेगा।

कार्यशाला में अन्य प्रमुख विचार
कार्यशाला के दौरान परिषद के सदस्य डॉ. नीरज उपमन्यु, डॉ. वेंकट रमण, डॉ. निरंजन बाबू और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम में डॉ. अंबर व्यास, डॉ. संजय चौहान, डॉ. श्रीकांत जोशी जैसे शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भी चर्चा की।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति
कार्यशाला में PCI के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अतुल नासा, रजिस्ट्रार डॉ. अनिल मित्तल, डॉ. प्रतिमा तिवारी सहित फार्मेसी क्षेत्र के अनेक शिक्षाविद उपस्थित थे। साथ ही, इंडियन फार्माकोपिया कमीशन, सीडीएससीओ और डीडीसी के पदाधिकारी भी इस कार्यशाला में शामिल हुए। इंडियन फार्मासिस्ट एसोसिएशन (IPA) के प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश्वर शर्मा ने जानकारी दी कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और भारतीय शिक्षण मंडल (BVM) के संयुक्त तत्वावधान में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन नई दिल्ली के नौरोजी नगर स्थित PCI के नवीन परिसर में किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य बी. फार्मा पाठ्यक्रम को उद्योग की आवश्यकताओं और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संरेखित करना था, साथ ही फार्मेसी शिक्षा को वैश्विक मानकों के साथ सामंजस्यपूर्ण दिशा प्रदान करना था। कार्यशाला के मुख्य अतिथि भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री बी.आर. शंकरानंद और मुख्य वक्ता इंडियन फार्मास्यूटिकल एलायंस (IPA) के महासचिव डॉ. सुदर्शन जैन थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. मोंटू कुमार पटेल ने की। इस अवसर पर देशभर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के फार्मेसी विशेषज्ञों के साथ-साथ भारतीय शिक्षण मंडल के विषय विशेषज्ञों ने भी सहभागिता की।

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