राजस्थानी भाषा को राज भाषा का दर्ज़ा नहीं मिल पाया हैं और अब इसके लिए विधायक हम्मीर सिंह भायल और रविंद्र सिंह भाटी ने आवाज़ उठाई हैं शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि राजस्थान में होकर राजस्थानी की पैरवी करता हूँ आज तक राजस्थानी भाषा को राज भाषा का दर्ज़ा नहीं मिल पाया इसके लिए कई लोगों ने लम्बा संघर्ष किया हैं लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया हैं। अनुच्छेद 345 के तहत सरकार इसको मान्यता दे सकती हैं जो की स्वागत योग्य कदम साबित होगा। वही दूसरी और विधायक हम्मीर सिंह भाटी ने भी विधानसभा में राजस्थानी भाषा को लेकर मुद्दा उठाया उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा को मान्यता राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी से नहीं मिल पायी हैं। जिसके कारण अभी तक राजस्थानी भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं किया। अभी तक 8वीं अनुसूची में 22 भाषाएं शामिल की जा चुकी हैं। आइये आपको सुनते हैं क्या कुछ कहा रविंद्र सिंह भाटी और हम्मीर सिंह भायल ने