भजनलाल सरकार ने गहलोत राज में बने 17 नए जिलों में से 9 जिलों और 3 संभागों को खत्म कर दिया है. शनिवार को कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया है. पूर्व की कांग्रेस सरकार ने सांचौर को जिला की मान्यता दी थी, लेकिन शनिवार को कैबिनेट की बैठक में इसे खत्म कर दिया गया. इसके बाद से स्थानीय लोगों ने जिले के रद्द होने को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. जानकारी के अनुसार, सांचौर जिले को कांग्रेस सरकार ने मंजूरी दी थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद भाजपा सरकार ने नए जिलों के गठन के लिए एक कमेटी का गठन किया था. इसके बाद से जिले के रद्द होने की संभावना जताई जा रही थी. इसी बीच भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने एक कार्यक्रम में सांचौर सहित अन्य जिलों को रद्द करने का बयान दिया था. इसके बाद पूर्व मंत्री सुखराम बिश्नोई के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए अनशन किया था. अब शनिवार को कैबिनेट की बैठक में जिले के रद्द करने की औपचारिक घोषणा कर दी गई है.
इसके बाद सांचौर के लोगों में भारी आक्रोश है और विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. इधर पूर्व मंत्री सुखराम बिश्नोई ने सांचौर को जिला निरस्त करने के राज्य सरकार के निर्णय को गलत बताते हुए इसकी आलोचना की है. पूर्व मंत्री सुखराम बिश्नोई ने कहा कि, सांचौर की जालोर मुख्यालय से 153 किलोमीटर दूरी होने की वजह से, एवं सांचौर के अंतिम गांव की दूरी ढाई सौ किलोमीटर होने की वजह से मापदंड पर खरा उतर रहा था. लेकिन सांचौर जिले को निरस्त कर गलत काम किया है. जिसका आने वाले समय में क्षेत्र की जनता जवाब देगी.जिला यथावत रखने की मांग को लेकर रविवार को कलेक्ट्रेट मुख्यालय सांचौर के आगे पूर्व मंत्री सुखराम बिश्नोई ने सम्मेलन बुलाया और सोमवार से महापड़ाव का एलान किया है.जिसको लेकर पूर्व मंत्री सुखराम विश्नोई ने सोशल मीडिया पर सांचौर की जनता से सोमवार को महापड़ाव में शामिल होने की अपील की है.