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फ्रिज का फ्रीजर आज हर घर का अभिन्न हिस्सा है। रात का बचा खाना, फ्रोजन मटर, आइसक्रीम से लेकर नॉन-वेज आइटम्स तक, लोग इसे खाने को सुरक्षित रखने का भरोसेमंद जरिया मानते हैं।


यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (यूएसडीए) के अनुसार, फ्रोजन सामान और भोजन को तीन से चार महीने के भीतर खा लेना चाहिए। इसके बाद उनकी गुणवत्ता में गिरावट शुरू हो जाती है। खास तौर पर पका हुआ खाना अगर दो घंटे से ज्यादा बाहर रह जाए और फिर फ्रिज में डाला जाए, तो यह माइक्रोब्स और बैक्टीरिया के पनपने का कारण बन सकता है। इन दिनों फ्रोजन पकोड़े, चीज बाइट्स और स्माइलिस जैसे प्रोडक्ट्स का क्रेज बढ़ा है। नौकरीपेशा मांओं के लिए ये समय बचाने का आसान तरीका हैं, लेकिन सेहत के लिए ये उतने फायदेमंद नहीं।
बार-बार डीफ्रॉस्टिंग से बढ़ता है खतरा
मांस या सब्जियों के पैकेट को बार-बार डीफ्रॉस्ट करके वापस फ्रीजर में डालना भी जोखिम भरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार जब आप खाने को बाहर निकालकर पिघलाते हैं और फिर जमाने के लिए फ्रीजर में रखते हैं, तो बैक्टीरिया के पनपने का पूरा इंतजाम हो जाता है। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि डीफ्रॉस्टिंग फ्रिज के अंदर ही करें और खाने को दो घंटे से ज्यादा बाहर की हवा से दूर रखें।
हम में से कई लोग सर्दियों में मटर खरीदकर साल भर फ्रीजर में स्टोर करते हैं। मौसम-बेमौसम कई प्रोडक्ट्स को फ्रीज करना हमारा शगल रहा है, लेकिन यह आदत सेहत के लिए मुसीबत का सबब बन सकती है। यूएसडीए की खाद्य सुरक्षा और निरीक्षण सेवा की रिपोर्ट कहती है कि लंबे समय तक फ्रीजर में रखा खाना भले ही पूरी तरह खराब न हो, लेकिन उसका स्वाद और पोषण दोनों प्रभावित होते हैं।


फ्रीजर बर्न और बदबूदार आइस क्यूब्स हैं खतरे की घंटी
अगर फ्रीजर में रखे खाने पर क्रिस्टल जैसी परत जमी दिखे, तो समझ लीजिए कि यह “फ्रीजर बर्न” का संकेत है। ऐसा खाना पूरी तरह खराब तो नहीं होता, लेकिन इसका स्वाद वैसा नहीं रहता जैसा आप उम्मीद करते हैं। इसके अलावा, आइस क्यूब्स को भी ज्यादा समय तक फ्रीजर में न छोड़ें। भले ही उनका आकार न बदले, लेकिन उनमें अजीब सी महक आने लगती है, जो इस्तेमाल के लायक नहीं रहते।
फ्रीजर है जरूरत, लेकिन सावधानी जरूरी
एक जमाने में फ्रिज लग्जरी का प्रतीक था, लेकिन आज यह हर घर की जरूरत बन गया है। छोटे से लेकर बड़े घर तक, इसके बिना गुजारा मुश्किल है। फ्रीजर खाने को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का बेहतरीन तरीका है, लेकिन यह हर चीज को हमेशा ताजा नहीं रख सकता। विशेषज्ञों की सलाह है कि फ्रीजर में खाना स्टोर करते वक्त दिन और महीनों का हिसाब रखें। अगली बार जब आप फ्रिज के ऊपर वाले बॉक्स में कुछ रखें, तो यह सुनिश्चित करें कि वह समय पर बाहर भी निकले, वरना आपकी सेहत को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
तो अब से फ्रीजर को स्टोर रूम न बनाएं, बल्कि सही समय पर सही चीजों का इस्तेमाल करें, ताकि स्वाद भी बरकरार रहे और सेहत भी।

खाटूश्याम जी का बहुप्रतीक्षित फाल्गुनी मेला शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार बाबा के दरबार में उत्साह की जगह उदासी छाई हुई है।

मेला प्रशासन और गांव वालों के बीच तीखी नोकझोंक ने मेले की रंगत को फीका कर दिया है। गुस्साए ग्रामीणों ने बाज़ार बंद कर विरोध जताया है, तो जिला प्रशासन अपनी ढीली तैयारियों के लिए आलोचना झेल रहा है। न कोई ठोस इंतज़ाम दिख रहा है, न ही सुचारु व्यवस्था का नामोनिशान। मेला प्रशासन के बड़े-बड़े दावे हवा में उड़ गए हैं, और कुछ अधिकारियों की मनमानी ने मेले को अव्यवस्था का अड्डा बना दिया है। श्रद्धालु निराश हैं, दुकानदार परेशान हैं, और बाबा के भक्त यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इस बार श्याम बाबा का आशीर्वाद भी प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगा? बाज़ार की सन्नाटे भरी गलियां और मेले का बेरंग माहौल इस पवित्र आयोजन की आत्मा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
“खाटूश्याम जी के फाल्गुनी मेले की शहनाई बजनी शुरू हुई, मगर इस बार ताल बेसुरा सा लग रहा है। एक तरफ गांव वालों का गुस्सा, जिन्होंने बाज़ार बंद कर प्रशासन को चुनौती दी है, तो दूसरी तरफ जिला प्रशासन की सुस्ती, जिसने मेले को अव्यवस्था के दलदल में धकेल दिया है। बाबा के भक्तों की भीड़ तो आई, मगर उन्हें न सुविधा मिली, न व्यवस्था का सहारा। मेला प्रशासन ने जो सपने दिखाए थे—साफ-सफाई, सुरक्षा, और शानदार इंतज़ाम—वो सब कागज़ों तक सिमट कर रह गए। उल्टा, कुछ अधिकारियों की मनमर्ज़ी ने मेले को ऐसा मज़ाक बना दिया कि न श्रद्धा की लौ जल रही है, न व्यापार की चहल-पहल दिख रही है। ग्रामीण चिल्ला रहे हैं, ‘हमारी बात सुनी जाए,’ और प्रशासन कह रहा है, ‘सब ठीक हो जाएगा,’ मगर सच यह है कि खाटूश्याम जी का मेला इस बार अपनी पहचान खोता नज़र आ रहा है। क्या बाबा का चमत्कार इस बार प्रशासन को राह दिखाएगा, या मेला अव्यवस्था की भेंट चढ़कर इतिहास में एक बदनुमा दाग बन जाएगा?”

जहाँ देश भर में होली का त्योहार रंगों, गुलाल और मिठाइयों के साथ मनाया जाता है, वहीं राजस्थान के उदयपुर जिले का एक छोटा सा गांव मेनार अपनी अनोखी परंपरा के लिए चर्चा में है।

मेनार गांव इस मौके पर एक अलग ही रंग में डूबा नजर आता है। यहाँ रंगों की जगह गोला-बारूद से होली खेली जाती है, और रात भर तोपों की गर्जना के बीच वीरता का उत्सव मनाया जाता है। इस परंपरा को “बारूद की होली” के नाम से जाना जाता है, जो सैकड़ों सालों से मेनार की पहचान बनी हुई है।”बारूद की होली” के नाम से मशहूर इस अनोखी परंपरा में न तो पिचकारी चलती है, न ही गुलाल उड़ता है, बल्कि रात भर गोलियों की बौछार और तोपों की गर्जना गूंजती है।

हर साल होली के अगले दिन या तीसरे दिन, जिसे स्थानीय भाषा में “जमरा बीज” कहा जाता है, मेनार गांव एक अनूठे रंग में रंग जाता है। यहाँ के ग्रामीण पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर चौपाल पर इकट्ठा होते हैं। पुरुष तलवारें और बंदूकें लिए नजर आते हैं, और रात के अंधेरे में हवा में गोलियों की बौछार शुरू हो जाती है। साथ ही, तोपों से गोले दागे जाते हैं, जिनकी गूंज मीलों तक सुनाई देती है। इस रोमांचक माहौल में महिलाएँ भी पीछे नहीं रहतीं। वे निडर होकर वीर रस से भरे गीत गाती हैं, जो इस उत्सव को और भी जीवंत बना देता है।रात के सन्नाटे को चीरती तोपों की आवाज और हवा में गूंजती गोलियों की तड़तड़ाहट इस उत्सव को किसी युद्ध के मैदान जैसा बना देती है। रात भर चलने वाली तोपों और गोलियों की आवाज़ के बीच गाए जाने वाले गीत इस बात का सबूत हैं कि मेनार के लोगों के दिल में आज भी वीरता और निडरता जिंदा हैं।

स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, यह परंपरा करीब 400-500 साल पुरानी है और मेवाड़ के गौरवशाली अतीत से जुड़ी है। किवदंती है कि मुगल काल में जब मेनार पर हमला हुआ, तो गाँव के वीर योद्धाओं ने दुश्मनों को अपनी शक्ति और साहस से खदेड़ दिया। उस विजय के जश्न के रूप में शुरू हुई यह बारूद की होली आज भी उसी जोश के साथ मनाई जाती है। यहाँ के निवासी इसे अपनी सांस्कृतिक धरोहर और वीरता के प्रतीक के रूप में देखते हैं।
इस अनोखे उत्सव का आकर्षण अब सिर्फ मेनार तक सीमित नहीं रहा। देश-विदेश से पर्यटक और यहाँ के मूल निवासी, जो विदेशों में बसे हैं, इस परंपरा को देखने के लिए लौटते हैं। रात भर चलने वाली तोपों और गोलियों की आवाज़ के बीच गाए जाने वाले गीत इस बात का सबूत हैं कि मेनार के लोगों के दिल में आज भी वीरता और निडरता जिंदा है। मेनार की यह बारूद की होली न केवल एक त्योहार है, बल्कि इतिहास, साहस और एकता का एक जीवंत उत्सव है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखता है। इस बारूद की होली का नजारा इतना रोमांचक है कि देश-विदेश से पर्यटक और विदेशों में बसे मेनार के मूल निवासी भी इसे देखने के लिए यहाँ आते हैं। रात भर चलने वाले इस उत्सव में सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाता है, ताकि परंपरा के साथ-साथ सभी की जान-माल की रक्षा हो सके। मेनार की यह अनूठी होली न केवल एक उत्सव है, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर का एक ऐसा रंग है, जो बारूद की गंध और वीरता के स्वरों से रंगा हुआ है। तो अगली बार होली की योजना बनाएँ, तो मेनार की इस “बारूद की होली” को जरूर देखें—जहाँ रंगों की जगह गोलियाँ बोलती हैं और तोपें ताल ठोकती हैं।

बेटे के शादी की तैयारी का जायजा लेने पहुंचे “मामा” ,उम्मेद भवन पैलेस व मेहरानगढ़ में होंगे आयोजन

अपनी बेटे के शादी की तैयारी का जायजा लेने और कृषि विश्वविद्यालय में चल रहे किसान मेले के समापन समारोह में शिरकत करने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह आज जोधपुर पहुंचे जहां एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया गया शिवराज सिंह ने भी सभी मेहमानों का वेलकम किया केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय की शादी अमानत से हो रही है अमानत प्रसिद्ध शूज निर्माता कंपनी लिबर्टी के अनुपम बंसल की बेटी है शादी की सभी तैयारियां शुरू हो चुकी है 6 मार्च को उम्मेद भवन पैलेस में कार्तिकेय और अमानत सात फेरे लेंगे।
एयरपोर्ट पर सभी मेहमानों का स्वागत देशी कलाकारों ने स्वर लहरियों से किया गया वही मेहमानों का एयरपोर्ट पर लस्सी ओर काजू कतली से मुंह मीठा करवाया गया एयरपोर्ट पर सभी मेहमानों के लिए रेड कारपेट बिछाया गया और यहीं से सभी मेहमान अलग-अलग होटल में गए। कार्तिकेयन और अमानत की शादी में विशेष तौर से राजस्थानी खाना परोसा जाएगा जिसमें केर सांगरी की सब्जी, गुलाब जामुन की सब्जी और मिर्ची बड़ा परोसा जाएगा।
केंद्र कृषि मंत्री ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बहू और बेटी हमारे लिए एक है। उन्होंने कहा कि बेटी है तो कल हैं, बेटी के बिना दुनिया नहीं चल सकती बेटी भगवान की सबसे अनमोल देन है जीवन भर बेटियों के लिए कुछ ना कुछ करने का प्रयास न करता रहूं ऐसी ही मेरी इच्छा है हमारे घर में अमानत आएगी बेटी के रूप में बेटी तो पूरी जीवन और दुनिया बदल देगी।
वही दूल्हे कार्तिकेय ने कहा कि सांस्कृतिक नगरी में नए जीवन की शुरुआत करने की खुशी है शादी की तैयारी का जिम्मा परिवार के सभी लोग संभाल रहे हैं।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री की उपस्थिति एवं ऑस्ट्रेलिया इंडिया वाटर सेंटर के तत्वाधान में कार्यशाला का आयोजन – राज्य सरकार एवं दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के मध्य जल क्षेत्र में तकनीकी सहयोग एवं नवीन तकनीकी के आदान-प्रदान हेतु साझा समझौते पर हस्ताक्षर

 जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल एवं दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की वॉटर एम्बैसेडर मिस कार्लिन मेवाल्ड की उपस्थिति में ऑस्ट्रेलिया इंडिया वाटर सेंटर (AWIC) के तत्वाधान में सोमवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जलदाय मंत्री ने पेयजल स्त्रोतों को दीर्घावधि तक कार्यरत रखे जाने की प्राथमिकता पर कार्य करने हेतु साझा तक्नीकी तथा शोध को बढ़ावा देने का आग्रह किया ताकि जल जीवन मिशन से पहुँचने वाले हर घर जल को लम्बे समय तक उपयोगी बनाया जा सके। साथ ही समुदाय को जल प्रबन्धन से जोड़ने की महती आवश्यकता को रेखांकित किया।

कार्यशाला के दौरान राज्य सरकार एवं दक्षिण  ऑस्ट्रेलिया के मध्य  ऑस्ट्रेलिया इंडिया वाटर सेंटर  (AWIC)  के माध्यम से जल क्षेत्र में तकनीकी सहयोग एवं नवीन तकनीकी के आदान-प्रदान हेतु साझा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। समझौते के अन्तर्गत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राजस्थान की पेयजल समस्याओं के निराकरण हेतु विस्तृत वार्ता की गई जिसमें जलाशयों में वाष्पीकरण की रोकथाम एवं इन्हें सौर उर्जा से जोड़ने के तरीके लागू करना, पेयजल के कुशल उपयोग व न्यूनतम खर्च में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल था।

इसके अतिरिक्त दूषित पेयजल के पुर्न-चक्रण हेतु आवश्यक तकनीकी सहयोग करना,पेयजल स्त्रोतों की दीर्घावधि धारिता सुनिश्चित करने हेतु जल जीवन मिशन को इससे जोड़ना, भूजल पुनर्भरण हेतु भूजल विभाग से फ्रेक्चर जोन चिन्हित कर वैज्ञानिक पद्धति से भूजल रिचार्ज करना, पेयजल के संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित कर विभिन्न भागीदारों के मध्य साझा सुझावों के आदानकृप्रदान से वैज्ञानिक रूप से पेयजल संरक्षण पर कार्य करना जैसे मुद्दे भी शामिल रहे।

कार्यशाला में  आर.ओ. वेस्ट वाटर के प्रबन्धन हेतु कारगर योजना बनाना, साझा रूप से क्षमताओं को बढ़ाकर सतही जल, कृषि, भू-जल एवं बुनियादी ढाँचे पर अर्न्तविभागीय प्रगति करना, जलदाय विभाग के अभियंताओं की क्षमता संवर्धन पर कार्य करना, पेयजल गुणवत्ता को हर घर जल के साथ-साथ सुनिश्चित करवाना,दक्षिण राजस्थान में वर्षा जल संग्रहण तंत्र को विकसित करना, चम्बल नदी के कैचमेण्ट एरिया में पानी के सम्पूर्ण ईको-सिस्टम को सक्रिय रूप से संरक्षित करना,वाटर-पॉलिसी और गर्वनेन्स फ्रेमवर्क को तैयार करने पर विचारकृविमर्श हुआ।

कार्यशाला में अतिरिक्त मुख्य सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भास्कर ए सावंत, मिशन निदेशक (जल जीवन मिशन) कमर उल जमान चौधरी इत्यादि के साथ-साथ MNIT के प्रोफेसर ए.बी. गुप्ता ने भी शिरकत की एवं अपने विचार साझा किए।

राज्य स्तरीय आरोग्य मेले ‘आरोग्यम्-2025’ में उमड़ा जनसैलाब – जयपुर के जवाहर कला केन्द्र में हो रहा मेले का आयोजन

 शिल्प ग्राम, जवाहर कला केन्द्र में आयुष विभाग द्वारा 1 मार्च से 4 मार्च तक आयोजित किये जा रहे राज्य स्तरीय आरोग्य मेले ‘आरोग्यम्-2025’ में तीसरे दिन भी भारी संख्या में लोगों को लाभान्वित किया गया। 

मेले में आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी, योग एवं नेचुरोपैथी चिकित्सा पद्धतियों द्वारा एक ही परिसर में उपचार एवं परामर्श की व्यवस्था की गई है। मेले में जन-सामान्य के स्वास्थ्य संरक्षण, स्वास्थ्य के प्रति चेतना एवं रोगों के निवारण हेतु चिकित्सा परामर्श के साथ-साथ आयुष चिकित्सा पद्धतियों की विभिन्न विधाओं से आमजन लाभान्वित हो रहे हैं। मेले में प्रातः 7 से 8 बजे तक योग विशेषज्ञों द्वारा योगाभ्यास करवाकर शारीरिक, मानसिक बीमारियों का ईलाज किया जा रहा है।

सोमवार को शासन उप सचिव सावन कुमार चायल के साथ डॉ. आनन्द कुमार शर्मा, निदेशक, आयुर्वेद विभाग, डॉ. बत्तीलाल बैरवा, नोडल प्रभारी मेला ने प्रत्येक स्टॉल पर जाकर अवलोकन किया।  प्रथम सत्र में चेयरपर्सन डॉ. श्रीराम तिवाडी (विशेषाधिकारी) उप मुख्यमंत्री, डॉ. समय सिंह मीणा, सहायक औषधि नियंत्रक के सानिध्य में डॉ. एकलव्य बोहरा, प्राचार्य एवं उनकी टीम स्वास्थ्य कल्याण, आयुर्वेद महाविद्यालय, जयपुर द्वारा यौगिक षट्कर्म का सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया।

द्वितीय सत्र में डॉ. योगेश्वरी गुप्ता, स्वास्थ्य कल्याण, होम्योपैथी महाविद्यालय, जयपुर ने अश्मरी (पथरी) पर व्याख्यान दिया जिसमें चेयरपर्सन के रूप में डॉ. अंशुमान चतुर्वेदी, सहायक नोडल प्रभारी मेला एवं डॉ. दिनेश चौधरी, सहायक निदेशक, होम्योपैथी रहे। सहायक निदेशक एवं मीडिया प्रभारी डॉ. लक्ष्मण सैनी ने बताया कि मेले में पंचकर्म चिकित्सा, मर्म चिकित्सा, जलौका चिकित्सा, अग्निकर्म चिकित्सा, औष्टियोपैथी, स्वर्णप्राशन, यूनानी चिकित्सा, होम्योपैथी चिकित्सा आदि के विशेषज्ञों द्वारा मेले में तीन दिवस में लगभग 16 हजार 802 जन-सामान्य को विभिन्न रोगों पर परामर्श एवं उपचार व निःशुल्क औषधि वितरण कर लाभान्वित किया गया।

औषध पादप मण्डल द्वारा मेले में औषधीय पादपों का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है। प्रतिदिन सायंकाल 6.30 बजे से 8 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मानस रोगों में लाभदायक रागों का प्रस्तुतीकरण भी किया जा रहा है।  

“12वें क्षेत्रीय थ्री आर और सर्कुलर इकॉनमी फोरम में सर्कुलर इकॉनमी इंसेंटिव स्कीम की घोषणा, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को 2 करोड़ तक की सहायता”

 मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि एवं प्रदूषण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सर्कुलर इकॉनमी अत्‍यंत प्रभावी माध्यम है। इस व्यवस्था में अपशिष्ट को रिसाइकिल और रियूज किया जाता है जिससे ऊर्जा की खपत घटती है और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार भी इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाकर मिशन में अग्रणी भूमिका निभा रही है। 

शर्मा सोमवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 12वें क्षेत्रीय थ्री आर और सर्कुलर इकॉनमी फोरम समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यावरण प्रबंधन केंद्र की स्थापना की गई है, ताकि कचरा प्रबंधन और रिसाइक्लिंग को ज्‍यादा प्रभावी तरीके से किया जा सके। साथ ही, ट्रीटेड वॉटर के उपयोग के लिए नई नीति तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री सद्भावना केंद्रों के जरिए नागरिकों को अनुपयोगी वस्तुओं के दान और पुनरुपयोग की सुविधा दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने राजस्थान में कचरा प्रसंस्करण की क्षमता को 21 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर इसके दोगुने से भी ज्‍यादा यानी करीब 45 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा है। वेस्ट-टू-एनर्जी योजनाओं के तहत कंपोस्ट, आरडीएफ, और जैविक उर्वरक उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में एमआरएफ प्लांट्स के जरिए प्लास्टिक और रिसाइकल योग्‍य सामग्री को अलग कर ई-वेस्‍ट, बैटरी वेस्ट और खतरनाक कचरे का निस्तारण किया जा रहा है। 

शर्मा ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन लगभग 400 प्रतिशत बढ़कर 106 बिलियन टन के आंकड़े को भी पार कर चुका है। चिंता की बात यह है कि इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक संसाधन बर्बाद हो जाते हैं और केवल 8.6 प्रतिशत ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में वापस आ पाते हैं। यह स्थिति धरती को संकट में डाल रही है और जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता की हानि एवं प्रदूषण जैसी समस्याएं गहराती जा रही हैं।

शर्मा ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने इन समस्याओं के समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता अभियान चलाया है। इसके साथ ही, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, सौर पैनल और कृषि अपशिष्ट जैसे 11 प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित सर्कुलर इकॉनमी रोडमैप तैयार किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान ने ग्रीन टेक्नोलॉजी और सतत विकास में भी पहल की है। राजस्थान पहला राज्य है जिसने ग्रीन बजट पेश किया है और इसमें 27 हजार 854 करोड़ रुपये ग्रीन परियोजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 250 करोड़ रुपये के निवेश के साथ सर्कुलर इकॉनमी पार्क और स्वच्छ एवं हरित तकनीक विकास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सर्कुलर इकॉनमी इंसेंटिव स्कीम लेकर आएगी, जो एमएसएमई और स्टार्टअप्स को 2 करोड़ रुपये तक की सहायता देगी। इसके साथ ही राजस्थान व्हीकल स्क्रैपिंग पॉलिसी के माध्यम से पुराने वाहनों के निष्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। श्री शर्मा ने कहा कि हम शून्य अपशिष्ट समाज का सपना साकार करने के लिए सर्कुलर इकॉनमी एलायंस नेटवर्क की स्थापना के जरिए सरकार, निजी क्षेत्र और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देंगे।

कार्यक्रम में केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि भारत सर्कुलर इकॉनमी के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। थ्री आर (रिड्यूस, रियूज एवं रिसाइकल) आज की अर्थव्यवस्था की जरूरत और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस फोरम में ‘जयपुर घोषणा पत्र‘ के तहत सी थ्री (सिटीज कोलिशन फॉर सर्कुलरिटीज) के मापदण्डों पर बल दिया जाएगा। इसमें संसाधन कुशल और कम कार्बन उत्सर्जन वाले समाज को बढ़ावा देने में अगले दशक की दिशा निर्धारित की जाएगी। 

खट्टर ने कहा कि सिटीज 2.0 एक ऐसी अनूठी पहल है जो इन्टीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेन्ट और जलवायु परिवर्तन की दिशा में कार्यवाही को आगे बढ़ाती है। इसके तहत 14 प्रदेशों के 18 शहरों में समयबद्ध रूप से परियोजनाओं को लागू कर कचरा प्रबंधन संयत्र लगाने, कचरे से खाद, कचरे से ऊर्जा बनाने पर जोर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि सर्कुलर इकॉनमी को अपनाते हुए ही कोई भी देश आत्मनिर्भर बन सकता है। केन्द्र सरकार ने पंचामृत लक्ष्य, मिशन लाईफ जैसे अभियानों से जहां अपशिष्ट के रिसाइकिल एवं रिड्यूस को बढ़ावा दिया हैं वहीं इससे नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन मिल रहा है। 

कार्यक्रम में जापान, यूएन, एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भी वीडियो संदेश के द्वारा अपने विचार व्यक्त किए। इससे पहले मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय शहरी विकास कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

इस अवसर पर नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा, मध्यप्रदेश, उत्तराखण्ड़, आंध्रप्रदेश और हरियाणा के शहरी विकास मंत्री, विभिन्न राज्यों के शहरी विकास विभागों के अधिकारीगण, नगरीय आयुक्त एवं महापौर उपस्थित रहे।

राज्यपाल से महाराष्ट्र के होम्योपैथी चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों ने मुलाकात की

 राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से सोमवार को राजभवन में महाराष्ट्र स्थित छत्रपति संभाजीनगर, होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों एवं होम्योपैथी चिकित्सकों के प्रतिनिधिमंडल ने विजय वातोडकर के नेतृत्व में मुलाकात की।

राज्यपाल बागडे ने इस दौरान उनसे संवाद कर राजस्थान की संस्कृति और विरासत के बारे में अवगत कराया। उन्होंने होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति का उपयोग पीड़ित मानवता की सेवाओं में किये जाने और चिकित्सा में सेवा-भाव को सर्वोपरि रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किये जाने का आह्वान किया।

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर पशुधन भवन में पक्षियों के लिए चुग्गे और पानी के परिंडे बांधकर अभियान की शुरूआत की मंत्री ने बजट में गौशालाओं का अनुदान बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री का किया धन्यवाद

इस अवसर पर मंत्री कुमावत ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम के भाव को लेकर चलती है जहां हर प्राणी मात्र का महत्व है, जहां गौमाता के साथ साथ पीपल ओर वटवृक्ष भी पूजे जाते हैं। हम प्राणी मात्र के प्रति दया और करुणा का भाव रखते हैं जिसमें मूक पशु पक्षी भी शामिल हैं। इसीलिए हम पशु और पक्षियों के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अभी गर्मी का मौसम शुरु हो रहा है। ऐसे में प्रदेश में कई स्थानों पर पशु पक्षियों के लिए पीने के पानी की समस्या हो जाती है। इसके लिए सरकार गौशालाओं में चारे पानी की व्यवस्था के लिए विशेष प्रयास करती है। आज विश्व वन्य जीव दिवस है आज के दिन पशुपालन विभाग प्रदेश भर में पक्षियों के लिए परिंडे बांधने की शुरूआत कर रहा है जिससे गर्मी के मौसम में पक्षियों को पानी की समस्या नहीं होगी और पशु और पक्षियों को स्वच्छ और पीने योग्य पानी मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान में कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी पशु पक्षियों के कल्याण के लिए काम करती हैं।

कुमावत ने राज्य सरकार के दोनों बजट में गौशालाओं के लिए चारे पानी के अनुदान में क्रमशः 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत वृद्धि करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से गौशालाओं में गायों के चारे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में और भी सहायता मिलेगी। 

इस अवसर पर विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा ने कहा कि आज विश्व वन्यजीव दिवस है। इस अवसर पर विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर विभाग की 10 हजार 500 संस्थाओं यहां पशुपालक अपने पशुओं को उपचार के लिए लेकर आते हैं, गोपालन विभाग के कार्यालय और प्रदेश की सभी गौशालाओं में उचित स्थान पर परिंडे बांधने और पानी के कुंड स्थापित करने का अभियान आज प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि आमजन तथा राजकीय विभागों का यह दायित्व है कि पशुओं एवं पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था हेतु आम नागरिक, स्वयंसेवी संस्थाओं, पशु- पक्षी प्रेमियों तथा अन्य स्टेक होल्डर्स को इसके लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने विभाग के अधिकारियों और कार्मिकों से भी चुग्गे की व्यवस्था के लिए अपना अपना योगदान देने का आग्रह किया।

मंत्री कुमावत ने इस अवसर पर स्वर्गीय डॉ शशांक मनोहर की स्मृति में 8 मार्च को आयोजित होने वाली 10वीं वेटरिनेरियन क्रिकेट लीग के पोस्टर का भी लोकार्पण किया। पशुपालन निदेशक और आरएलडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ आनंद सेजरा, गोपालन निदेशक प्रह्लाद सहाय नागा तथा मत्स्य विभाग की निदेशक संचिता विश्नोई ने भी पक्षियों के लिए परिंडे बांधे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पशुपालन, गोपालन और मत्स्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।

संसदीय कार्य मंत्री की अध्यक्षता में जोधपुर जिले के सांगरिया सीटीईपी में उद्योगों के प्रदूषित पानी के ट्रीटमेंट के लिए समीक्षा बैठक आयोजित — प्रदेश सरकार जोजरी नदी के पुनरुद्धार के लिए कृत संकल्पित —संसदीय कार्य मंत्री — सीटीईपी सदस्य इकाइयों में उपचारित जल की आपूर्ति का किया उद्घाटन

 संसदीय कार्य, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में रविवार को जोधपुर जिले के सांगरिया स्थित संयुक्त उपचारित जल संयंत्र के सभागार में जोधपुर के औद्योगिक क्षेत्र सांगरिया के सीटीईपी संयंत्र के परिचालन एवं इंडस्ट्रियल वेस्ट वाटर के ट्रीटमेंट के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक के पश्चात संसदीय कार्य मंत्री पटेल, शहर विधायक अतुल भंसाली, जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल एवं लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा ने संयुक्त उपचारित जल संयंत्र की सदस्य इकाइयों में उपचारित जल की आपूर्ति का उद्घाटन किया।

पटेल ने कहा यशस्वी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार जोजरी नदी के पुनरुद्धार के लिए कृत संकल्पित है। उन्होंने कहा बजट में जोजरी नदी के पुनरुद्धार के लिए 176 करोड़ रूपये का बजट आवंटित किया है। हमारा लक्ष्य है कि जोजरी और लूणी नदी में स्वच्छ एवं निर्मल जल प्रवाहित हो।

प्रकृति एवं मानव जीवन के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा— पटेल

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा हमें गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, जोजरी नदी में प्रदूषित पानी के कारण स्वास्थ्य एवं आजीविका पर अनेक हानिकारक प्रभाव पड़ रहे है। उन्होंने कहा प्रदूषण का स्तर अकल्पनीय है, क्षेत्र की हजारों बीघा जमीन पूर्णतः बंजर हो गई है। गांवों में बदबू और प्रदूषित पानी के कारण  मलेरिया एवं डेंगू जैसी अनेक बीमारियों फैल रही है। पटेल ने कहा प्रकृति एवं मानव जीवन के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिए निर्देश—

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि उद्योगों द्वारा ट्यूबवेल के माध्यम से धरती के अंदर जहरीला पानी डाला जा रहा है और टैंकरों द्वारा रात्रि के समय प्रदूषित जल जोजरी नदी में छोड़ा जा रहा है। 

उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को बिना ट्रीटमेंट किए पानी छोड़ने वाले उद्योगों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

प्रत्येक उद्योगपति अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाएं, बिना ट्रीटमेंट के पानी नहीं छोड़े—

पटेल ने कहा प्रत्येक उद्योगपति अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाएं बिना ट्रीटमेंट के पानी नहीं छोड़े। जिससे प्रकृति और मानव जीवन को बचाया जा सके। उन्होंने कहा भूमि के बंजर होने से किसानों की आजीविका पर संकट आया है। गन्दे पानी के कारण लूणी विधानसभा क्षेत्र के 3 विद्यालय भी शिफ्ट करने पड़े है।

‘जियो और जीने के दो’—

संसदीय कार्य मंत्री ने उद्योगपतियों से आह्वान करते हुए कहा भगवान महावीर के सिद्धांत ‘जियो और जीने के दो’ के अनुरूप प्रकृति रक्षण और जोजरी के निर्मल प्रवाह का संकल्प लें।

प्रदेश सरकार द्वारा उद्योगों को बेहतर सुविधाएं एवं अनुकूल वातावरण प्रदान किया जा रहा है

पटेल ने कहा प्रदेश की समृद्धि और विकास के लिए उद्योग सबसे महत्वपूर्ण है। प्रदेश सरकार द्वारा उद्योगों को बेहतर सुविधाएं एवं अनुकूल वातावरण प्रदान किया जा रहा है। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में विभिन्न समस्या का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

उद्योग पर्यावरणीय मानकों का पालन करें—

पटेल ने कहा हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरण—

प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि उद्योग पर्यावरणीय मानकों का पालन करें और समाज के प्रति अपनी जवाबदेही निभाएं।

रीको को दिए निर्देश—

पटेल ने रीको के अधिकारियों को औद्योगिक क्षेत्र में समय पर सड़क की मरम्मत, साफ-सफाई व्यवस्था और उद्योगों से संबंधित आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए।

वृक्षारोपण अभियान का किया शुभारंभ—

संसदीय कार्य मंत्री ने पेड़ लगाकर वृक्षारोपण अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा वृक्ष न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करते है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और हरित भविष्य सुनिश्चित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।