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Women’s Day Special: राजस्थान का अनूठा महिला मिनी बैंक, जहां सिर्फ महिलाएं हैं कमान में

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Women’s Day Special: राजस्थान का अनूठा महिला मिनी बैंक, जहां सिर्फ महिलाएं हैं कमान में

डूंगरपुर, राजस्थान: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर आज हम बात करते हैं राजस्थान के डूंगरपुर जिले के बरबोदनिया गांव की, जहां एक ऐसा मिनी बैंक है जो पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित है और महिलाओं के लिए ही काम करता है। यह बैंक न सिर्फ राज्य का पहला महिला मिनी बैंक है, बल्कि देश में अपनी तरह का दूसरा उदाहरण भी है। करीब दो दशक से यह बैंक महिला सशक्तिकरण की मिसाल बना हुआ है, जिसका सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपये से अधिक है।
महिलाओं के हाथ में पूरी जिम्मेदारी
जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर बरबोदनिया ग्राम पंचायत में स्थित इस मिनी बैंक की स्थापना 28 जनवरी 2002 को हुई थी। सहकारी समिति अधिनियम के तहत पंजीकृत इस बैंक में कैशियर से लेकर मैनेजर और अध्यक्ष तक सभी पदों पर महिलाएं कार्यरत हैं। यहां पुरुषों के लिए न तो कोई काम है और न ही उनके नाम से कोई खाता। इसी वजह से इसे ‘मिनी महिला बैंक’ के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में बैंक की अध्यक्ष शांतिदेवी पुंजोत हैं, जबकि मैनेजर सीमा भगत और कैशियर गजरा एकोत शुरू से ही इसकी बागडोर संभाले हुए हैं।
कैसे हुई शुरुआत?
सीमा भगत और गजरा एकोत बताती हैं कि साल 2001 में टामटिया लैंप्स के मैनेजर सोहनलाल सेवक की प्रेरणा से उन्होंने महिला बचत समूह की नींव रखी। छह महीने तक समूह को सफलतापूर्वक चलाने के बाद इसे 2002 में मिनी बैंक के रूप में पंजीकृत किया गया। तब से यह महिलाओं की मेहनत और लगन का प्रतीक बना हुआ है।
1700 से अधिक खाते, 40 लाख से ज्यादा का ऋण
आज इस बैंक में 281 महिला समिति सदस्य हैं और 1700 से अधिक खाते संचालित हो रहे हैं, जिनमें 642 बचत खाते, 666 आरडी खाते और 429 एफडी खाते शामिल हैं। बैंक ने अब तक 213 महिलाओं को 40 लाख 45 हजार रुपये का ऋण वितरित किया है। इसकी कुल जमा राशि 2 करोड़ रुपये है और औसत मासिक टर्नओवर 20 लाख रुपये है। बैंक का अपना भवन भी है, जहां से सभी गतिविधियां संचालित होती हैं।
आत्मनिर्भरता की राह पर महिलाएं
यह मिनी बैंक न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहा है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर भी ले जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में बिना किसी पुरुष सहायता के महिलाओं द्वारा संचालित यह बैंक एक प्रेरणादायक मिसाल है। डूंगरपुर का यह प्रयास न सिर्फ राजस्थान, बल्कि पूरे देश के लिए महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत संदेश देता है।

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