एन. रघुरामन का कॉलम:किटी पार्टियां बुक क्लब्स से किताब का एक पन्ना ले सकती हैं!

May 1, 2026 - 06:10
एन. रघुरामन का कॉलम:किटी पार्टियां बुक क्लब्स से किताब का एक पन्ना ले सकती हैं!
85 साल की बेकी नेडेलमैन आज भी अमेरिका के लॉस एंजिल्स में अपना क्लब चलाती हैं। 2001 में शुरू हुए इस क्लब के सदस्य हर महीने मिलते हैं। कुछ सदस्य तो 90 से अधिक उम्र के हैं। उन्होंने कभी मासिक मीटिंग मिस नहीं की। हमारी किटी पार्टियों की तरह यह भी किसी एक महिला के घर पर होती है, जो मौसम के हिसाब से स्नैक्स और ड्रिंक्स का इंतजाम करती हैं। यह साथ उनकी जिंदगी के हर दौर से गुजरा है- शादी से मां बनने तक और बीमारी से तलाक तक। सदस्य तभी कम होते हैं, जब दुर्भाग्य से कोई गुजर जाए या कहीं और चला जाए। बेकी कहती हैं कि हर गुजरते साल के साथ इसका भावनात्मक महत्व और बढ़ता है। ये मुलाकातें जितनी लंबी चलती हैं, उतना ही वे एक-दूसरे के लिए अहम बनती जाती हैं। आज वे उस उम्र में हैं, जहां कभी-कभी दोस्तों को खो देती हैं। कई ने अपने पति भी खो दिए हैं। इसीलिए ये मीटिंग्स और भी अहम हो जाती हैं। तो मिल कर वे क्या करती हैं? वे किताबें पढ़ती हैं। हां, सही पढ़ा। यही उनकी किटी पार्टी है। 25 वर्षों में उन्होंने 252 किताबें पढ़ ली हैं। ये सदस्य हर किताब पर जीवंत बहस करते हैं। सदस्यों के दिमागी तौर पर खुलेपन के कारण यह क्लब चल रहा है। किसी को लेखक पसंद आता है, लेकिन उसकी किताब नहीं। किसी के विचार इससे उलट होते हैं। कुछ सोचते हैं कि लेखक को किताब का अंत कैसे करना चाहिए था। यही बहस हर मीटिंग के बाद उन्हें और समझदार बनाती है, क्योंकि उन्हें एक ही किताब पर कई नजरिए सुनने को मिलते हैं। इससे उन्हें एक विषय को विविध नजरियों से देखने में मदद मिलती है। हममें से कई लोगों ने देखा होगा कि हमारी मासिक मीटिंग्स घटती रुचि, समय न मिलने, घरेलू कारणों, यात्रा या रिश्तेदारों से जुड़े मसलों के कारण खत्म हो जाती हैं। लेकिन ‘बेकीज बुक क्लब’ की हर मीटिंग में आज भी जीवंत बहस होती है। किताब या लेखक के बारे में हर महिला की राय को दूसरे धैर्य से सुनते हैं और बहस करते हैं, क्योंकि यह पुराने दोस्तों का समूह है- जो गपशप नहीं, साहित्य पर बात करने जुटते हैं। अमेरिका में महिलाओं के अलग-अलग क्लब होते हैं- जैसे इन्वेस्टमेंट क्लब, जहां निवेश पर चर्चा होती है। प्लान्ड पैरेंटहुड क्लब, जहां माता–पिता बनने से पहले की तैयारियां साझा होती हैं। ऐसे ही बेकीज बुक क्लब में सिर्फ साहित्य प्रेमी और सच्चे बुक-रीडर हैं। जून 2001 से यह समूह 252 किताबें पढ़ चुका है और हर किताब का विस्तृत रिकॉर्ड रख रहा है। समूह समकालीन साहित्य पढ़ता है, लेकिन बीच-बीच में वे क्लासिक्स भी पढ़ लेते हैं। जो चीज इस समूह को खास और बिना रुकावट चलने वाला बनाती है, वह यह है कि हर सदस्य अलग-अलग विषयों की किताबें पढ़ने को तैयार रहता है। वे कोई विचार यह कहकर नहीं ठुकराते कि ‘मुझे ऐसी किताबें पढ़ना पसंद नहीं।’ पढ़ना उम्रदराज लोगों के दिमाग को गॉसिप से दूर रखकर साझा बौद्धिक चर्चा से जोड़ता है, जिससे स्थिर व रचनात्मक समुदाय बनता है। अलग-अलग साहित्य पर जीवंत चर्चा सदस्यों को सक्रिय व बौद्धिक तौर पर मजबूत रखती है। यह मेंटल वर्कआउट जैसा है, जो 90 की उम्र में भी कॉग्निटिव क्षमता मजबूत रखता है। रिसर्च बताती है कि ऐसा कॉग्निटिव स्टिमुलेशन दिमाग के न्यूरल पाथ-वे को सक्रिय रख कर डिमेंशिया, अल्जाइमर से लंबे समय बचाए रख सकता है। अध्ययन ये भी बताते हैं कि किताबें पढ़ने वाले लोग उन लोगों से ज्यादा जीते हैं, जो नहीं पढ़ते। मानसिक सक्रियता और बेकीज जैसे क्लब्स में मिलने वाले सामाजिक सहारे का कॉम्बिनेशन बढ़ती उम्र में एक ताकतवर ‘सर्वाइवल एडवांटेज’ बनाते हैं। ये क्लब्स स्ट्रेस मैनेजमेंट के अलावा अकेलेपन से जूझने में मदद करते हैं। उद्देश्य देते हैं, जैसे 252 किताबें पढ़ना। और सबसे अहम, बुजुर्गों को अपनी जिंदगी जीने में मदद करते हैं। यह निजी पीड़ा को साझा मानवीय अनुभवों में बदल देते हैं। फंडा यह है कि अगर हमारी किटी पार्टियों में कम से कम 100 पेज की किताबें पढ़ना शुरू करें तो इससे हमारी समझदार महिलाओं का ज्ञान जीवन के कई पहलुओं में और अधिक समृद्ध हो सकता है।