एन. रघुरामन का कॉलम:वैश्विक समस्याओं को पहचानकर टेक्नोलॉजी से निकालें समाधान

Jun 25, 2026 - 06:10
एन. रघुरामन का कॉलम:वैश्विक समस्याओं को पहचानकर टेक्नोलॉजी से निकालें समाधान
44 साल की सारा लव के लिए ऐप बनाना आसान नहीं था। वजह? उनके लिए टेक्नोलॉजी काला अक्षर भैंस बराबर थी। उन्होंने एक दशक तक बीमा सेक्टर में काम किया था। लेकिन फिर उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से फुल-टाइम डेवलपर बनने का फैसला किया, ताकि वे कोडिंग की उलझाऊ दुनिया डीकोड कर सकें। वे हफ्तों तक किचन में लैपटॉप लेकर कोड की एक-एक लाइन दुरुस्त करती रहीं। वे जब हताश होतीं तो खुद से कहतीं, जरा बड़े मकसद के बारे में सोचो। उन्हें यकीन था, अगर वे किसी एक महिला को भी मुश्किल परिस्थिति से निकाल पाईं, तो उनका मकसद पूरा हो जाएगा। दरअसल, उन्हें खुद ऐसे ऐप की जरूरत महसूस हुई थी, क्योंकि वे भी घरेलू हिंसा की शिकार रह चुकी थीं। घरेलू हिंसा का मुद्दा भारत तक सीमित नहीं है। तुर्किये, बांग्लादेश और इराक जैसे देशों में घरेलू हिंसा की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है, जबकि विकसित देशों में अमेरिका इसमें सबसे आगे है। घरेलू हिंसा ऐसी कड़वी सच्चाई है, जो हर देश में मौजूद है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 3 में से 1 महिला (करीब 30%) कभी न कभी पार्टनर द्वारा शारीरिक या यौन हिंसा का सामना करती है। हालांकि डेनमार्क, फिनलैंड और पश्चिमी यूरोप के कुछ विकसित देशों ने महिलाओं की सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और कानूनी अधिकारों के लिए मजबूत सिस्टम बनाए हैं, लेकिन कोई भी देश घरेलू हिंसा खत्म नहीं कर पाया। इसलिए अब टेक्नोलॉजी के जरिए हल ढूंढना और जरूरी है। जब मुंबई में इस मुद्दे पर चर्चा चल रही थी, तो मेरे एक दोस्त ने घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए बनाया गया सारा का ऐप देखने की सलाह दी। ऐप का नाम है- सिस्टर सिग्नल। इसका आइडिया सारा को एक मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले रिश्ते के अपने अनुभव से आया। उन्होंने कुछ रिश्तेदारों को भी इससे गुजरते देखा था। वे इस ऐप को बनाने में इसलिए कूद पड़ीं क्योंकि वे यह देखकर थक चुकी थीं कि महिलाओं के लिए ऐसे टूल कम हैं, जो इमोशनली इंटेलिजेंट (संवेदनशील), सौम्य और व्यावहारिक हों। वे चाहती थीं कि ऐप सौम्य और संवेदनशील हो, ताकि दूसरी महिलाएं इसे इस्तेमाल करते समय सुरक्षित, सहज और शांत महसूस करें। यह ऐप एपल ऐपस्टोर पर मुफ्त उपलब्ध है, हालांकि अभी एंड्रॉइड पर नहीं आया है। इसका डेस्कटॉप वर्जन sistersignal.org पर है। ऐप का मुख्य कॉन्सेप्ट गर्ल-कोड नाम का एक मैसेज भेजना है। ऐप में मौजूद सेफ्टी टैब को सिर्फ एक बार दबाने पर यह यूजर के कम से कम पांच दोस्तों या रिश्तेदारों को मैसेज भेज देता है, जिन्हें ऐप में ट्रस्टेड सर्कल यानी भरोसेमंद ग्रुप कहा गया है। मैसेज ऐसा होता है : मैं एक डेट पर हूं और चीजें थोड़ी अजीब हो रही हैं... मेरा हालचाल पूछते रहना और हर 15 मिनट में कॉल करना। अगर मैं फोन न उठाऊं, तो तुरंत मेरे घर या भेजी गई लोकेशन पर आ जाना। देखा जाए तो यह ऐप ऐसी कम्युनिटी तैयार कर रहा है, जहां लोग एक-दूसरे का ख्याल रख सकें। जैसे सिस्टर सिग्नल ऐप सपोर्ट और संसाधन देने का काम करता है, वैसे ही हमें भारत में भी कुछ ऐसा बनाना होगा, जो खतरे के शुरुआती संकेतों को गंभीरता से ले, हमारा सुरक्षा सिस्टम मजबूत करे और सुनिश्चित करे कि संकट में फंसी महिलाओं को, बिना जजमेंट या सवाल-जवाब के मदद और संसाधन मिलें। टेक्नोलॉजी ऐसा समाधान दे सकती है, जो हर किसी के लिए सही हो। फंडा यह है कि अब फोकस उन आईटी दिग्गजों पर होगा, जो दुनिया में उभरती हुई ऐसी समस्याओं को पहचानकर, तकनीक के जरिए ठोस समाधान निकाल सकें!