डोनाल्ड ट्रम्प का कॉलम:हमारे दुश्मन जंग हार रहे हैं, और अमेरिका जीत रहा है

Apr 3, 2026 - 13:50
डोनाल्ड ट्रम्प का कॉलम:हमारे दुश्मन जंग हार रहे हैं, और अमेरिका जीत रहा है
अमेरिका की सेना द्वारा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किए हुए एक महीना हो चुका है। इसके निशाने पर दुनिया का सबसे बड़े आतंकवाद-प्रायोजक देश ईरान है। इन चार सप्ताहों में, हमारी सशस्त्र सेनाओं ने युद्धभूमि पर तेज, निर्णायक और अभूतपूर्व जीतें प्राप्त की है। ईरान की नौसेना खत्म हो चुकी है। उनकी वायुसेना खंडहर में बदल गई है। उसके अधिकांश नेता अब मृत हैं। आईआरजीसी पर उनकी कमान और नियंत्रण को ध्वस्त किया जा रहा है। मिसाइलें और ड्रोन लॉन्च करने की उनकी क्षमता नाटकीय रूप से कम हो गई है, और उनके हथियार, कारखाने तथा रॉकेट लॉन्चर नष्ट किए जा रहे हैं। युद्धों के इतिहास में किसी भी दुश्मन को कुछ ही हफ्तों में इतने बड़े पैमाने पर, स्पष्ट और विनाशकारी नुकसान नहीं उठाने पड़े हैं। हमारे दुश्मन हार रहे हैं, और अमेरिका जीत रहा है। हम तेल और गैस के मामले में मध्य-पूर्व से पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। और फिर भी हम वहां मौजूद हैं। हमें इसकी जरूरत नहीं है। हमें उनका तेल नहीं चाहिए। लेकिन हम अपने सहयोगियों की मदद के लिए वहां हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी अमेरिका की सुरक्षा और एक स्वतंत्र विश्व की रक्षा के लिए क्यों आवश्यक है। जिस दिन मैंने 2015 में राष्ट्रपति पद के लिए अपने अभियान की घोषणा की थी, उसी दिन से मैंने यह वादा किया था कि मैं ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दूंगा। यह चरमपंथी हुकूमत पिछले 47 वर्षों से अमेरिका और इजराइल की मौत के नारे लगाती रही है। इसके सहयोगी 241 अमेरिकियों की हत्या और बेरूत में मरीन बैरकों पर बमबारी के पीछे थे। हमारे सैकड़ों सैनिकों की सड़क किनारे लगाए बमों से हत्या की गई। वे यूएसएस कोल पर हमले में शामिल थे। उन्होंने अनेक जघन्य कृत्य किए हैं, जिनमें इराजइल में 7 अक्टूबर की भयावह घटनाएं भी शामिल हैं। इस हुकूमत ने ईरान में विरोध कर रहे अपने ही 45,000 लोगों को भी मार डाला! इन आतंकवादियों के पास यदि परमाणु हथियार हों, तो यह एक असहनीय खतरा होगा। मैंने बराक हुसैन ओबामा के ईरान परमाणु समझौते को समाप्त कर दिया। ओबामा ने उन्हें 1.7 अरब डॉलर नकद दिए। हरे-हरे नोट- वर्जीनिया, डीसी और मैरीलैंड के बैंकों से निकालकर। सारी नकदी हवाई जहाजों से भेजी गई। लेकिन यह काम नहीं आया। उन्होंने हमारा मजाक उड़ाया और बम हासिल करने के अपने मिशन पर बढ़ते रहे। मेरी पहली प्राथमिकता हमेशा कूटनीति रही। लेकिन ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की अपनी कोशिशों पर अड़ा रहा और हर समझौते के प्रयास को ठुकराता रहा। इसी कारण, जून में मैंने ईरान की प्रमुख परमाणु फेसिलिटीज़ पर हमला करने का आदेश दिया- ऑपरेशन मिडनाइट हैमर। हमने उन परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इसके बाद ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को एक बिल्कुल अलग स्थान पर फिर से खड़ा करने की कोशिश की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि उनका परमाणु हथियारों को छोड़ने का कोई इरादा नहीं था। वे तेजी से बैलिस्टिक मिसाइलों का विशाल भंडार भी तैयार कर रहे थे और जल्द ही उनके पास ऐसी मिसाइलें होतीं, जो अमेरिका, यूरोप और पृथ्वी के किसी भी स्थान तक पहुंच सकती थीं। हमारे उद्देश्य बहुत सरल और स्पष्ट हैं। हम व्यवस्थित रूप से ईरानी हुकूमत की उस क्षमता को समाप्त कर रहे हैं, जिससे वह अमेरिका को धमकी दे सके या अपनी सीमाओं के परे जाकर शक्ति का प्रदर्शन कर सके। और हमने यह कर दिया है। हमारे मुख्य रणनीतिक उद्देश्य अब लगभग पूर्ण होने के करीब हैं। हम पृथ्वी पर तेल और गैस के नंबर एक उत्पादक हैं। सऊदी अरब और रूस मिलकर भी हमसे पीछे हैं। हम होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से लगभग कोई तेल आयात नहीं करते, और भविष्य में भी नहीं करेंगे। हमें इसकी आवश्यकता नहीं है। दुनिया के जो देश होर्मुज से तेल प्राप्त करते हैं, उन्हें उसे अपने नियंत्रण में लेकर उसकी रक्षा करनी चाहिए। वे यह आसानी से कर सकते हैं। हम सहयोग करेंगे, लेकिन जिस तेल पर वे इतने निर्भर हैं, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्हें स्वयं निभानी चाहिए। जिन देशों को फ्यूल नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए मेरा एक सुझाव है। अमेरिका से तेल खरीदिए। हमारे पास बहुत है। और दूसरा, थोड़ा साहस जुटाइए, होर्मुज पर जाइए, उसे अपने नियंत्रण में लीजिए, उसकी रक्षा कीजिए और अपने उपयोग के लिए इस्तेमाल कीजिए। ईरान को पराजित कर दिया गया है। कठिन काम पूरा हो चुका है, इसलिए अब यह आसान होना चाहिए।