पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:विपरीत वातावरण में सिर्फ अध्यात्म से मिलेगी शांति

Apr 3, 2026 - 13:50
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:विपरीत वातावरण में सिर्फ अध्यात्म से मिलेगी शांति
झूठ बोलना एक विकल्प है, जिसे हम चुनते हैं। क्योंकि जिसे झूठ बोलना आता है, वो सच तो बोल ही सकता है। लेकिन जब भी हमारे पास चयन का अवसर आता है, हम सच को कठिन और झूठ को आसान मान लेते हैं। पहले कहा जाता था कि गांव के लोग सच्चे हैं और शहर में गली-गली, डगर-डगर झूठ बसता है। लेकिन अब बेईमानी, निकम्मापन, झूठ- सब जगह पसर गया, क्या शहर, क्या गांव? वर्तमान युद्ध ने शहरी जीवन को हिला के रख दिया है। बचत में गिरावट आ गई, जिसके परिणाम भविष्य में दिखेंगे। ये तो तय है कि मनुष्य के शहरी जीवन में पिछले 20 सालों में हमने जो परिवर्तन और प्रगति की है, वो पिछले 2 हजार साल में नहीं हुई। डिजिटल मीडिया ने एक नियम पकड़ लिया कि लोगों को इतना प्रभावित कर दिया जाए कि वो उसकी बात मानें। प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और अपराध शहर के विकास का हिस्सा बन गए। ऐसे में सिर्फ आध्यात्मिक गलियारे हैं, जहां मनुष्य को ऐसे विपरीत वातावरण में रहते हुए भी शांति मिल सकती है।