बोरिया मजुमदार का कॉलम:क्रिकेट का सबसे बड़ा टैलेंट- हंट बन चुका है आईपीएल
दिसम्बर 2025 में जब आईपीएल के ऑक्शन चल रहे थे, तब धार्मिक स्वभाव वाले प्रफुल्ल हिंगे एक मंदिर में थे। वहीं उन्हें पता चला कि उन्हें एसआरएच ने 30 लाख में खरीद लिया है। 2023 में हिंगे को पीठ में गंभीर चोट लगी थी और कई लोगों को लगता था कि वो इससे कभी उबर नहीं पाएंगे। लेकिन लगातार कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार वे एसआरएच के लिए गेंद हाथ में लेकर मैदान में उतरे। उनके सामने आईपीएल की सफलता की बड़ी कहानियों में से एक वैभव सूर्यवंशी थे। लेकिन हिंगे दबाव में नहीं आए। उन्हें खुद पर भरोसा था और वे अपनी किस्मत खुद लिख रहे थे। पहले ही स्पेल में तीन विकेट लेकर उन्होंने ठीक ऐसा ही किया। मुकुल चौधरी ने भी यही किया। ईडन गार्डन्स में केकेआर के खिलाफ 130 पर 7 विकेट गंवाकर एलएसजी साफ तौर पर दबाव में थी। तभी मुकुल चौधरी ने खुलकर खेलने का फैसला किया। आईपीएल से पहले बहुत कम लोगों ने उनका नाम सुना था। हां, घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन के आधार पर यह चर्चा जरूर थी कि यह युवा खिलाड़ी गेंद पर जोर से प्रहार करता है। लेकिन सुर्खियों से दूर किसी लोकल फॉर्मेट में खेलना और आईपीएल में खेलना : इनमें वैसा ही अंतर है जैसा किसी सेकंड डिवीजन क्लब के लिए खेलना और चैम्पियंस लीग में खेलना। करोड़ों दर्शकों और करोड़ों रुपयों के निवेश के साथ आईपीएल को ‘मदर ऑफ ऑल स्पेक्टेकल्स’ कहा जा सकता है। और ईडन गार्डन्स के रंगमंच पर चौधरी ही केंद्रीय किरदार थे। यह सिर्फ प्रफुल्ल या मुकुल की ही बात नहीं है। समीर रिजवी से लेकर प्रियांश आर्य और साकिब हुसैन तक- ये नए चेहरे ही आईपीएल की असली पहचान हैं। इनमें से हर नाम अपने में एक कहानी है। साकिब हुसैन को ही लें। बिहार के गोपालगंज और सिवान के धूल भरे मैदानों में उन्हें अपने वास्तविक नाम से नहीं पुकारा जाता था। अस्थायी पिचों पर टेनिस-बॉल क्रिकेट देखने के लिए जुटने वाले स्थानीय लोगों के लिए तेज रफ्तार से गेंद फेंकने वाला वह लम्बा-पतला किशोर बस ‘रबाडा’ के नाम से जाना जाता था। गोपालगंज के ‘रबाडा’ से लेकर सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने तक, इस युवा के लिए यह सफर काफी लंबा रहा है। वैभव सूर्यवंशी और प्रियांश आर्य तो इस बात के बेहतरीन उदाहरण हैं कि आईपीएल खिलाड़ियों के साथ क्या करता है। इनमें से कोई भी सामने वाले गेंदबाज की प्रतिष्ठा से दबाव में नहीं आता। वे गेंदबाज को नहीं, सिर्फ गेंद को खेल रहे होते हैं। अगर वैभव यह सोचते कि वे बुमराह या हेजलवुड का सामना कर रहे हैं, तो कभी वैसे शॉट्स नहीं खेल पाते, जो उन्होंने खेले हैं। लेकिन वे सिर्फ गेंद पर ध्यान दे रहे थे। वे अपनी किस्मत खुद लिख रहे थे और ऐसा करते हुए टीम को जीत की ओर ले जा रहे थे। बेझिझक और बेफिक्र, निडर और सकारात्मक : ये बल्लेबाज किसी भी क्षण दबाव में नहीं दिखते। अगर गेंद उनके दायरे में है, तो वे उसे मारेंगे। यही ताजगी भरा नजरिया आईपीएल को वह बनाता है जो कि वह है- युवा प्रतिभाओं का उभरता हुआ केंद्र, जहां सितारे जन्म लेते हैं और करियर बनते हैं। आईपीएल में आकर ये युवा लड़के परिपक्व होते हैं और खुद को बड़े मंच के लिए तैयार करते हैं। ऊपर जितने भी खिलाड़ियों का नाम लिया गया है, उनमें से कोई भी दबाव में आने वाला नहीं है। फिर भले ही वे असफल हों- जैसा कि वैभव, साकिब, प्रफुल्ल और मुकुल के साथ पिछले मैचों में हुआ। लेकिन वे जानते हैं कि हमेशा दूसरा मौका मौजूद होता है। यही नई पीढ़ी के भारतीय सितारों की पहचान है, जिन्होंने आईपीएल की बदौलत रातोंरात जनमानस में अपनी जगह बना ली है। देश के कोने-कोने का प्रतिनिधित्व करने वाली टीमों के चलते यह टूर्नामेंट सर्वसमावेशी स्वरूप वाला भी बन जाता है। आज किसी युवा के लिए भारतीय टीम में जगह बनाना बेहद कठिन है, लेकिन दस टीमों वाले आईपीएल में रास्ता बनाना इसकी तुलना में कहीं आसान है। जैसे ही आप अच्छा प्रदर्शन करते हैं, आप टेलीविजन और डिजिटल माध्यमों पर लाखों लोगों के बीच छा जाते हैं और रातोंरात सितारे बन जाते हैं। ऐसे में हमारे पास यह मानने की तमाम वजहें हैं कि आयरलैंड और यूके के आगामी दौरों के लिए वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में भी जगह बना सकते हैं। एक मायने में आईपीएल देश का सबसे बड़ा टैलेंट हंट है, जो हर साल दो महीनों तक चलता है, सपनों को पूरा करता है और महत्वाकांक्षाओं को संवारता है। यही इसकी उत्तरोत्तर सफलता का कारण भी हमारे सामने स्पष्ट करता है। अपने 19वें सीजन में यह और भी बड़ा और बेहतर होने की ओर अग्रसर है। और ऐसा करते हुए यह हमें और भी कई युवा सितारे देगा- जिनका हम उत्सव मना सकेंगे। बेझिझक और बेफिक्र, निडर और सकारात्मक : ये खिलाड़ी कभी दबाव में नहीं दिखते। यही ताजगी भरा नजरिया आईपीएल को वह बनाता है जो कि वह है- युवा प्रतिभाओं का केंद्र, जहां सितारे जन्म लेते हैं और करियर बनते हैं। (ये लेखक के अपने विचार हैं)