एन. रघुरामन का कॉलम:इंसानियत वो कमा सकती है, जो कोई अपने पूरे जीवन में नहीं कमा सकता
सिडनी के बॉन्डी बीच पर दिसंबर, 2025 में जब आतंकवादी हमला हुआ तो वहां मौजूद हैदराबाद निवासी 37 वर्षीय रहमत पाशा भागे नहीं, जबकि उनके पास वाहन था। इस हमले में 15 लोग मारे गए, जबकि 40 घायल हुए थे। पाशा न तो पुलिस अधिकारी थे और न ही पैरामेडिक। लेकिन उस दिन यह कैब ड्राइवर उम्मीद की किरण बन गया। बाद में समाचारों में आया कि वे न केवल गोलियों से बचे, बल्कि कई गंभीर घायलों के पास पहुंचे, उन्हें एंबुलेंसों तक पहुंचाया और 18-20 लोगों की जान बचाई। पाशा ने घबराए लोगों की सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने में भी मदद की। यह करते हुए उन्होंने खुद के डर को किनारे रखा और सदमे में आए लोगों की बातें भी धैर्य से सुनीं। इस बुधवार खबर आई कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने उन्हें स्थायी निवास की अनुमति दी है। उसके साथ पत्नी और तीन बच्चे भी अब वहां रह सकेंगे। सरकार ने यह भी तय किया है कि उस दिन उन्होंने जो कैप पहनी थी, वह सिडनी म्यूजियम में प्रदर्शित की जाएगी। उन्हें कई बहादुरी पुरस्कारों के लिए भी नॉमिनेट किया गया है। मेरे लिए यह महज साहसिक कहानी नहीं है। यह एक ऐसे वेल-परफॉर्मिंग लीडर की कहानी है, जिसने ‘CARE’ के साधारण सबक से बहुत-से लोगों को मैनेजमेंट का पाठ पढ़ाया। मैं कहूंगा कि पाशा में वेल-परफॉर्मिंग लीडर के सभी गुण मौजूद थे। यह बात अलग है कि हालात ने उन्हें टैक्सी ड्राइवर बना दिया। एक वेल-परफॉर्मिंग लीडर हमेशा जानता है कि अकसर लोग इसलिए विफल नहीं होते क्योंकि उनमें क्षमता की कमी होती है। याद रखिए, वे पर्यटक भागने या हमलावरों को काबू करने में सक्षम थे। लेकिन वे इसलिए संघर्ष कर रहे थे, क्योंकि शायद उन्हें अपने और खुद को सफलतापूर्वक बचाने के बीच कुछ बाधाएं नजर आ रही थीं। पाशा ने वही बाधाएं देखीं। किसी अपेक्षा और तारीफ की चाह के बिना उन्होंने चुपचाप लोगों को बचाने में मदद की। उनका ‘CARE’ का सबक हमें चार बातें सिखाता है। 1. C: कनेक्टिंग योरसेल्फ विद द नीड : अच्छे लीडर पहले 360 डिग्री पर हालात का विश्लेषण करते हैं और कार्रवाई से पहले समझते हैं कि उन्हें कैसे काम करना चाहिए। फुटबॉल खिलाड़ी मेस्सी से जुड़े आंकड़े याद करें। मैच में वह 83% समय मैदान पर चलते रहते हैं, जबकि बाकी खिलाड़ी दौड़ रहे होते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि वह गेंद को गोलपोस्ट में धकेलने से पहले विपक्षी खिलाड़ियों का 360 डिग्री पर जायजा लेते हैं। 2. A: अडाप्टेशन टु द सिचुएशन : कोई टैक्सी ड्राइवर चाहता तो किसी यात्री को घर छोड़कर अतिरिक्त पैसे कमा सकता था। लेकिन पाशा जानते थे कि उन्हें लोगों की जान बचानी है। इसलिए वे बार-बार लौटते रहे और कई लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। अच्छे लीडर हमेशा समझते हैं कि अलग-अलग लोगों को विभिन्न परिस्थितियों में अलग तरह की मदद की जरूरत होती है। इसीलिए लीडर को हर परिस्थिति के लिए अलग नजरिया चाहिए होता है। सरल शब्दों में अच्छा लीडर खुद को हालात के मुताबिक ढालता है। 3. R: रिमूव बैरियर्स : पाशा ने तत्काल हमलावरों की बाधाओं को पार किया और घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। अच्छे लीडर कर्मचारियों और लक्ष्यों के बीच मौजूद बाधाओं को पहचानते हैं और उन्हें हटाने की कोशिश करते हैं। 4. E: एनेबल सक्सेस : उस कठिन समय में पाशा ने लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए कई तरीके से मदद की। अच्छे लीडर हर समस्या खुद हल नहीं करते। वे रुकावटों को हटाते हैं, ताकि लोग खुद अपनी समस्या हल कर सकें। बॉन्डी बीच जैसे हर हिंसक हमले को उसमें जान गंवाने वाले मासूम लोगों के लिए याद किया जाएगा। लेकिन ये हमले असाधारण काम करने वाले साधारण लोगों के लिए भी उतने ही याद किए जाते हैं- गोलीबारी की ओर दौड़ते पुलिस अधिकारी, अपने सर्फबोर्ड को स्ट्रेचर में बदलने वाले लाइफसेवर्स, आतंकवादी को निहत्था करने वाला कोई दुकानदार और वो भारतीय कैब ड्राइवर, जिसने टैक्सी को कमाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाने के लिए इस्तेमाल किया। फंडा यह है कि नफरत सुर्खियां बना सकती है, लेकिन अच्छे लीडर इंसानियत के जरिए ऐसी कहानियां लिखते हैं, जो लंबे समय तक याद की जाती हैं। वे अपने कर्मचारियों की परवाह करके उन्हें वर्कप्लेस पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद भी करते हैं।