एन. रघुरामन का कॉलम:‘25 मिनट’ तकनीक से व्यक्ति सर्वश्रेष्ठ परिणाम हासिल कर सकता है

May 27, 2026 - 06:10
एन. रघुरामन का कॉलम:‘25 मिनट’ तकनीक से व्यक्ति सर्वश्रेष्ठ परिणाम हासिल कर सकता है
‘सर, प्लीज बताइए कि हमारे समय को कैसे मैनेज करें?’ युवा मुझसे यही एक सवाल कई बार पूछ चुके हैं। जब भी वे पूछते हैं, मैं तुरंत अपना जवाब ऐसे देता हूं कि ‘माइंड को मैनेज करने के लिए आपको योग करने की जरूरत है।’ और मेरी बात पूरी होने से पहले ही स्टूडेंट बीच में बोलेगा, ‘सर, मैंने टाइम मैनेजमेंट के बारे में पूछा है।’ मैं आत्मविश्वास से जवाब दूंगा- ‘मैं भी यही कह रहा हूं कि माइंड को कैसे मैनेज करें।’ युवक झुंझला कर कहेगा कि ‘सर टाइम, T I M E।’ मैं जवाब दूंगा, ‘क्या तुमने M I N D कहा?’ वह भागता हुआ आएगा और सामने खड़े होकर चिल्लाएगा- ‘सर, टाइम।’ इससे अन्य लोग हंसेंगे, क्योंकि कुछ को लगेगा कि मैं कम सुनता हूं, बाकी समझ जाएंगे कि मैं प्रैंक कर रहा हूं। फिर मैं उसे स्टेज पर बुलाऊंगा और 1980 की एक कहानी सुनाऊंगा, जिसमें इटालियन यूनिवर्सिटी का एक छात्र फ्रांसेस्को सिरिलो परीक्षा की तारीखों को लेकर भारी दबाव में था और पढ़ाई से बेहद परेशान हो चुका था। उसे एहसास हुआ कि उसका दिमाग ध्यान भटकाने में माहिर है। वह घंटों डेस्क पर बैठता, लेकिन कुछ भी हासिल नहीं होता। परेशान होकर उसने खुद से शर्त लगाई कि क्या वह सिर्फ 10 मिनट तक पूरी तल्लीनता से और बिना रुकावट के पढ़ सकता है? उसने किचन में जाकर टमाटर जैसे आकार का और तेज आवाज करने वाला मैकेनिकल किचन टाइमर उठाया, जिसे इटालियन भाषा में ‘पोमोडोरो’ कहते हैं। उसने टाइमर को घुमा कर सेट किया और बैठ गया। शुरुआती कुछ कोशिशों में वह विफल रहा, क्योंकि अंदरूनी भटकाव उसे रोक रहा था। लेकिन वह समय सीमा बदलता रहा। आखिरकार उसे पता चला कि 25 मिनट का समय सबसे सही ‘स्वीट स्पॉट’ है- पर्याप्त लंबा कि काम में सार्थक प्रगति हो सके और पर्याप्त छोटा कि दिमाग भटकने की न सोचे। एक समय पर सिर्फ 25 मिनट के एक-एक ब्लॉक पूरे करते हुए सिरिलो फोकस की विफलता से यूनिवर्सिटी की परीक्षा पास करने तक पहुंच गया। अंतत: उसने उसी छोटे किचन टाइमर को वैश्विक प्रोडक्टिविटी मूवमेंट में बदल दिया। आज सिरिलो द्वारा विकसित ‘पोमोडोरो तकनीक’ का इस्तेमाल पश्चिमी दुनिया में ऐसे बहुत-से लोग करते हैं, जिन्होंने टालमटोली की आदत छोड़ने के लिए सब आजमा लिया लेकिन विफल रहे। तो इसे कैसे करें? 5 स्टेप यहां पेश हैं : 1. एक काम चुनें : जो करना चाहते हैं, वो एक खास काम चुनें। 2. टाइमर सेट करें : 25 मिनट का टाइमर सेट करें। 3. काम करें : टाइमर बजने तक पूरा ध्यान उसी काम पर लगाएं। न मल्टीटास्किंग और न फोन चेक करें। 4. छोटा ब्रेक लें : टाइमर बजते ही 5 मिनट का ब्रेक लें। स्ट्रेच करें या कुछ पी लें। 5. लंबा ब्रेक लें : लगातार 25 मिनट के चार ‘पोमोडोरो’ पूरे करने के बाद 15-30 मिनट का री-स्टोरेटिव ब्रेक लें। यह तरीका इसलिए कारगर है, क्योंकि महज 25 मिनट काम का संकल्प लेना किसी घंटों लंबे भारी प्रोजेक्ट के बजाय कहीं कम डरावना होता है। सख्त टाइमर व्यक्ति का ध्यान कई चीजों में भटकाने के बजाय सिंगल टास्किंग माइंडसेट को प्रोत्साहित करता है। युवाओं को इसका यह फायदा मिलता है कि छोटे और नियमित अंतराल दिमाग को जरूरी आराम देते हैं, जिससे जानकारी प्रोसेस करना आसान होता है और दिनभर प्रोडक्टिविटी ऊंची रहती है। इसके लिए किसी खास टाइमर मशीन में निवेश की जरूरत नहीं है। पुराना साधारण टाइमपीस भी उपयोगी हो सकता है, लेकिन कृपया मोबाइल फोन न लें। अगर आप गहन अध्ययन या जटिल समस्या सुलझाने जैसे अत्यधिक दिमागी मेहनत के विषय पर काम कर रहे हैं तो इस तकनीक को अपनी ऊर्जा के हिसाब से ढाल सकते हैं। फंडा यह है कि कम से कम उन लोगों के लिए, जिन्हें टालमटोली की बहुत ज्यादा आदत है, 5 मिनट के ब्रेक लेते हुए काम को 25 मिनट के फोकस्ड हिस्सों में बांटना न सिर्फ थकान से बचाएगा, बल्कि फोकस को भी अधिकतम कर देगा।