पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:अपनी खूबियों को दूसरों की सेवा में लगाएं लेकिन समय से

Apr 23, 2026 - 06:09
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:अपनी खूबियों को दूसरों की सेवा में लगाएं लेकिन समय से
अपना बेस्ट भी समय पर डिलीवर करिए, ये प्रबंधन की दुनिया की एक समझाइश है। इसमें दो बातें हैं- बेस्ट और समय। हमारी जो खूबियां हैं, उनको जरूर दूसरों की सेवा में लगाएं, लेकिन समय पर लगाएं। बचपन, युवावस्था, प्रौढ़ावस्था और वृद्धावस्था- इनमें हमारा जीवन भाग रहा है। एक रूपक के द्वारा इन चार अवस्थाओं को समझें। बचपन यानी गलियां- गलियों में जिस तरह बच्चे खेलते हैं, आवागमन होता है, एक अजीब-सा अपनापन है गलियों में। धीरे-धीरे गलियां लुप्त हो रही हैं। युवावस्था को यूं समझें कि बीच नगर से निकलने वाला रास्ता, जिसमें सबसे ज्यादा जाम लगता है। युवावस्था में विचारों, स्थितियों, व्यक्तियों का जाम लग जाता है। समझ नहीं आता आगे कैसे जाएं? प्रौढ़ावस्था बीच शहर में बने पुल जैसी है, आप अपनी सुविधा से ऊपर से निकल जाइए। वृद्धावस्था को हाईवे की तरह मान लीजिए। टोल-टैक्स जमा करिए और थोड़ा आराम से चलिए। ये चार उम्र और इन चार व्यवस्थाओं को समझें और इनमें अपना बेस्ट दें।