पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:अपने भीतर ही एक नायक को रचने की तैयारी करें
पहले इंसान बनाने का काम माता-पिता, गुरुजन और समाज द्वारा किया जाता था। यह अभी भी चल रहा है, लेकिन सावधानी नहीं रखी तो इंसान बनाने का काम मशीन हाथ में ले लेगी। इसलिए टेक कंपनियों के कार्यों पर आध्यात्मिक फिल्टर लगाने का समय आ गया है। हमारी संस्कृति में परमात्मा ने एक अनूठा प्रयोग किया है और वो है अवतार का प्रयोग। भगवान जब अवतार लेते हैं तो मनुष्य बनकर आते हैं और वो सारी क्रियाएं करते हैं, उन सभी घटनाओं से गुजरते हैं- जिससे मनुष्य गुजरता है। वो अपनी लीला में यह संदेश दे जाते हैं कि मैंने मनुष्य बनकर कठिन समय में जो-जो भी किया, अच्छे समय को जैसे भी भोगा, वही तुम लोग करो। अवतार सिखाते हैं अपने भीतर शांति-साधना का नायक तैयार करो। आज हमारे अधिकांश लीडरों के भीतर न तो शांति है और न ही कोई साधना है। वो साधन से नेता बन गए, साधना से नहीं बने। जब बाहर की दुनिया में ऐसे नायक की संभावना समाप्त हो जाए तो हमें अपने ही भीतर उसकी तैयारी करनी पड़ेगी।