पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:काम के बीच में अपने को पुनः ऊर्जावान भी करते रहिए

Jun 19, 2026 - 06:08
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:काम के बीच में अपने को पुनः ऊर्जावान भी करते रहिए
बहुत सारे लोग आठ-दस घंटे लगातार काम करते हैं और कुछ लोग एक-दो घंटे में बार-बार ब्रेक लेते हैं। दोनों ही स्थितियां ठीक नहीं हैं। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि लगातार यदि काम करना है तो अवधि चार घंटे की रखिए, इसे कहेंगे जमकर काम करना। चार घंटे तक काम करें तो मानसिक थकान नहीं आएगी। फिर ब्रेक लें और फिर जुट जाएं। मध्यांतर में क्या करें? योग के आठ चरण हैं। इसमें तीसरा चरण है आसन, चौथा है प्राणायाम, पांचवां है प्रत्याहार, छठा है धारणा। यह चार काम चार-पांच मिनट के लिए कर लीजिए। आसन, यानी बॉडी की स्ट्रेचिंग करिए। प्राणायाम, मतलब आती-जाती सांस पर दृष्टि डालिए। प्रत्याहार का अर्थ होता है अपनी इंद्रियों को भीतर मोड़िए। और धारणा का अर्थ होता है मन को एकाग्र करिए। आपका जो मध्यांतर है, इन चार बातों से यदि भर गया तो अगले चार घंटे के लिए आप एकदम तरोताजा रहेंगे। तो जमकर काम करिए, डूबकर करिए, लेकिन बीच-बीच में हर चार घंटे बाद अपने-आप को पुनः ऊर्जावान करिए।