पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:साधु को धन का प्रयोग करते समय सावधान रहना होगा
चुनावों का धन तो बेहिसाब होता ही है, लेकिन जब मंदिरों का धन भी बिना हिसाब के हो जाए तो चिंता होना स्वाभाविक है। इस दौर में तो धर्म भी धन के बिना नहीं चलता। इसलिए साधु को धन का प्रयोग करते समय अत्यधिक सावधान होना होगा। दार्शनिक लोग कहते हैं कि संत न ईमानदार होते हैं, न बेईमान। वो तो सिर्फ वह करते हैं, जो प्रकृति उनसे कराती है। महात्माओं का सिद्धांत होता है कुछ आप करें, कुछ होने दें। राम मंदिर में जो कुछ भी हुआ, उनमें कुछ लोग तो राम का ही काम कर रहे थे। लेकिन रावण बीच में आ जाए तो क्या करें? रावण डरता है हनुमान जी से। जीवन में ऐसा कठिन समय आ जाए कि जो गलत काम हमने न किया हो, उसके अपयश का कलंक भी लग जाए तो हनुमान चालीसा का सहारा लेना चाहिए। उसकी प्रत्येक पंक्ति मंत्र है और मंत्र आत्मविश्वास जगाता है, सुरक्षा देता है। रक्षाबंधन के पूर्व इंदौर से श्रीहनुमान चालीसा का महापाठ किया जाता है ‘एक शाम रिश्तों के नाम’ कार्यक्रम में। माताएं-बहनें अपने आत्मविश्वास को जगाने के लिए रक्षाबंधन पर हनुमान जी को राखी अवश्य बांधें या चढ़ाएं।