रजनीश गुप्ता और विपुल अनेकांत का कॉलम:साइबर ठगों की सबसे बड़ी ताकत है हमारी चुप्पी और निष्क्रियता
हर दिन हजारों लोगों को साइबर ठगों के संदिग्ध फोन कॉल्स आते हैं या मैसेज और वॉट्सएप लिंक प्राप्त होते हैं। इनमें से अधिकांश लोग ठगी के शिकार नहीं बनते। वे या तो कॉल काट देते हैं या मैसेज को नजरअंदाज कर देते हैं। फिर भी अनुमानित तौर पर 5 प्रतिशत से कम लोग ही ठगी के ऐसे प्रयासों की शिकायत दर्ज कराते हैं। इसके कारण भी हैं। लोगों के पास समय की कमी होती है। कई लोगों को संस्थाओं पर भरोसा नहीं होता। कुछ लोग नौकरशाही की उदासीनता या अधिकारियों के बेरुखे रवैये के अपने पुराने अनुभवों के कारण शिकायत करने से बचते हैं। लेकिन इसका नतीजा यह रहता है कि साइबर ठग का मोबाइल नंबर सक्रिय बना रहता है और वह नए-नए लोगों को निशाना बनाता रहता है। नागरिकों की यही चुप्पी अपराधियों की मदद करती है। यदि अधिक लोग ठगी के असफल प्रयासों की भी शिकायत दर्ज कराएं, तो इन साइबर ठगों के पूरे नेटवर्क को बहुत जल्दी कमजोर किया जा सकता है। लेकिन सवाल उठता है कि शिकायत कहां करें और कैसे करें? अच्छी बात यह है कि अब शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी पुलिस थाने या सरकारी कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं है। दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा विकसित एक सरल मोबाइल एप्लिकेशन "संचार साथी' के जरिये कोई भी नागरिक घर बैठे ही किसी संदिग्ध मोबाइल नंबर की शिकायत दर्ज करा सकता है। महज कुछ ही मिनटों में यह प्रक्रिया साइबर ठग के सिम कार्ड और जरूरत पड़ने पर उसके मोबाइल हैंडसेट को भी ब्लॉक करा सकती है। साइबर ठगी की तकनीकी प्रक्रिया को समझ लेने से भी लोग समय रहते सतर्क हो सकते हैं। कई मामलों में ठगी की शुरुआत किसी एपीके फाइल या ऐसे लिंक से होती है, जिसमें *21*(10-अंकों का मोबाइल नंबर)# प्रारूप वाला विशेष कोड छिपा होता है। जैसे ही आप उस फाइल को इंस्टॉल करते हैं या लिंक पर क्लिक करते हैं, आपका वॉट्सएप अकाउंट हैक हो सकता है या उस पर साइबर ठग का नियंत्रण हो सकता है। इसके बाद कॉल फॉरवर्डिंग और एसएमएस फॉरवर्डिंग बिना यूजर की जानकारी के सक्रिय कर दी जाती है। साइबर ठग पीड़ित का वॉट्सएप चलाने लगता है, उस पर आने वाले संदेश पढ़ता है और उसी खाते का इस्तेमाल आगे की ठगी के लिए करता है। अकसर वह अपने विक्टिम के परिवार के सदस्यों या मित्रों से संपर्क कर उन्हें भी ठगी का शिकार बनाने की कोशिश करता है। ऐसी किसी भी साइबर धोखाधड़ी के बाद पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि अपने मोबाइल फोन से ##21# डायल करें। यह सरल-सा कोड एक साथ सभी कॉल फॉरवर्डिंग और एसएमएस फॉरवर्डिंग सेवाओं को निष्क्रिय कर देता है। इसके बाद यूजर को वॉट्सएप की आधिकारिक शिकायत प्रणाली के माध्यम से "माय अकाउंट हैज बीन हैक्ड' विकल्प चुनकर इसकी सूचना देनी चाहिए। फेसबुक अकाउंट प्रभावित होने पर उसकी आधिकारिक रिकवरी सुविधा और इंस्टाग्राम अकाउंट प्रभावित होने पर भी उसकी आधिकारिक शिकायत प्रणाली का उपयोग करना चाहिए। यह मान लेना गलत है कि केवल तकनीकी जानकारी न रखने वाले लोग ही साइबर अपराधों के शिकार बनते हैं। कोई उच्च शिक्षित व्यक्ति, कंप्यूटर इंजीनियर या नियमित रूप से साइबर सुरक्षा संबंधी सलाह का पालन करने वाला व्यक्ति भी इसका शिकार हो सकता है। मानसिक थकान, तनाव, शारीरिक अस्वस्थता या साधारण-सी असावधानी कुछ समय के लिए व्यक्ति की सतर्कता को कम कर सकती है। ऐसे ही किसी कमजोर क्षण में कोई विश्वसनीय प्रतीत होने वाला फोन कॉल या मैसेज अपना काम कर जाता है। साइबर अपराधी हमारी चुप्पी पर निर्भर रहते हैं। जब ठगी के प्रयास से बच निकलने वाले लोग भी शिकायत दर्ज नहीं कराते, तो वही मोबाइल नंबर सक्रिय बने रहते हैं और नए-नए लोग उनका शिकार बनते रहते हैं।
इससे बचें। सतर्क रहें। तुरंत रिपोर्ट करें। किसी भी समस्या के समाधान की शुरुआत यहीं से होती है।
(ये लेखकों के अपने विचार हैं)