डारियो अमोदेई का कॉलम:एआई की गति इतनी तेज है कि हम उससे पिछड़ रहे हैं

Jun 12, 2026 - 06:08
डारियो अमोदेई का कॉलम:एआई की गति इतनी तेज है कि हम उससे पिछड़ रहे हैं
‘द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स’ की एक उपकथा में दो हॉबिट्स अपने जंगल की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। वे इसके लिए एक ट्री-बीयर्ड से अनुरोध करते हैं। ट्री-बीयर्ड एक बुद्धिमान किंतु अत्यंत धीमी गति से काम करने वाला वृक्ष है। समस्या यह थी कि जहां एक पूरी सेना जंगल को काटकर नष्ट कर रही होती है, वहीं ट्री-बीयर्ड का समय-बोध बहुत धीमा होता है। उसे किसी दूसरे वृक्ष को ‘हेलो’ कहने में ही पूरा दिन लग जाता था, इसलिए उसे और उसके साथियों को इतनी त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार करना लगभग असंभव था। एआई और हमारे राजनीतिक संगठनों का रिश्ता भी कुछ-कुछ हॉबिट्स और ट्री-बीयर्ड जैसा लगता है। एआई अत्यंत तेज गति से आगे बढ़ रहा है। महज चार वर्ष पहले तक एआई मॉडल मुश्किल से एक सही कोड-पंक्ति लिख पाते थे, लेकिन आज प्रमुख एआई कंपनियों में अधिकांश कोड वे ही लिख रहे हैं। इसी प्रकार की प्रगति जीव-विज्ञान, भौतिकी, गणित, वित्त, विधि, अनुवाद और अनेक अन्य क्षेत्रों में भी देखी गई है। एआई के स्केलिंग नियमों को अब एक दशक से अधिक के अनुभवजन्य प्रमाणों का समर्थन प्राप्त है। यदि ये स्केलिंग नियम केवल एक-दो वर्ष और जारी रहते हैं, तो संभवतः हम उस अवस्था तक पहुंच जाएंगे, जिसे मैंने ‘पावरफुल एआई’ कहा है। इसके विपरीत, नीतियां और कानून बनाने की गति अत्यंत धीमी है। कई बार इसके उचित कारण भी होते हैं। सरकारों के पास गंभीर और व्यापक शक्तियां होती हैं, और सामान्यतः यह बेहतर माना जाता है कि उनका उपयोग जल्दबाजी में न किया जाए। किंतु टाइमस्केल का यह असंतुलन तकलीफदेह है। कई वर्षों में संसद कोई निर्णय लेती है, वहीं उतने समय में एआई प्रतिभाओं से भरे एक पूरे देश की क्षमताओं तक पहुंच जाता है! पिछले कुछ वर्षों में- जब से एआई एक प्रमुख कॉमर्शियल टेक्नोलॉजी के रूप में उभरी है- हममें से कई लोग जो इसे जिम्मेदाराना ढंग से संचालित करना चाहते थे, एक दुविधा का सामना कर रहे थे। हम स्पष्ट रूप से देख पा रहे थे कि यह तकनीक किस दिशा में जा रही है। हमें लग रहा था कि कुछ ही वर्षों में एआई उन दुर्लभ टेक्नोलॉजी में से एक बन जाएगी, जो पूरे नीतिगत परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल देती हैं- ठीक वैसे ही जैसे परमाणु हथियारों ने भू-राजनीति को बदल दिया था और औद्योगिक क्रांति ने आर्थिक प्रश्नों की प्रकृति को बुनियादी तौर पर रूपांतरित कर दिया था। लेकिन जो लोग उस समय एआई की क्षमताओं को देख रहे थे, उन्हें यह कहीं अधिक साधारण तकनीक लगती थी- शायद किसी नए कंज्यूमर ऐप या क्रिप्टोकरेंसी की तरह। अधिकांश नीति-निर्माताओं और कंपनियों को यह विश्वास दिलाना कठिन था कि मुक्त-बाजार आधारित दृष्टिकोण के अलावा भी कोई और नीति उचित हो सकती है। सच कहें तो एआई के व्यापक प्रभाव उस समय तक उपस्थित भी नहीं थे, और हम यह भी नहीं जानते थे कि वे किस रूप में सामने आएंगे। इसलिए सही नीतियां बनाना कठिन था। लेकिन इन सीमाओं को देखते हुए सेफ्टी पर फोकस करने वाले संगठनों (जिनमें एन्थ्रोपिक भी शामिल है) ने ऐसी नीतिगत पहलों पर ध्यान केंद्रित किया है, जो भविष्य के विकल्पों को सुरक्षित रखें, आगे चलकर तीव्र प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करें, या दुनिया को इस बात की बेहतर समझ दें कि आगे क्या आने वाला है- जैसे पारदर्शिता संबंधी कानून, चिप निर्यात नियंत्रण और एआई के श्रम-बाजार पर प्रभावों से संबंधित डेटा का संग्रह। माना कि ये उपाय नाकाफी हैं, लेकिन अब तक तो यही कदम ऐसे मालूम होते हैं, जिन्हें वास्तव में संभव बनाया जा सकता था। हालांकि पिछले कुछ महीनों में एआई की असाधारण शक्ति और उससे जुड़े जोखिमों के प्रमाण इतने स्पष्ट हो गए हैं कि अब उन्हें नजरअंदाज करना संभव नहीं रहा। शायद इसका सबसे प्रतीकात्मक उदाहरण क्लॉड मायथोस प्रिव्यू है। अब हम जानते हैं कि अग्रणी एआई मॉडल साइबर सुरक्षा के लिए वास्तविक और गंभीर जोखिम उत्पन्न करते हैं, जिससे वित्तीय क्षेत्र, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों और राष्ट्रीय सुरक्षा में व्यवधान की संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। वास्तव में, मायथोस ने वैश्विक साइबर सुरक्षा परिदृश्य को झकझोर दिया है। लेकिन इसने यह भी सिद्ध कर दिया कि एआई मॉडल अब रणनीतिक महत्व के उपकरण बन चुके हैं। अब हमें ऐसे नीतिगत तंत्र को सक्रिय करना होगा, जो आने वाले समय के जोखिमों का सामना कर सके। यह उत्साहजनक है कि हमारे अनेक समकालीन भी अब उन दृष्टिकोणों की ओर आ रहे हैं, जिनकी वकालत हम पिछले कुछ वर्षों से करते रहे हैं। हमें कुछ जरूरी बिंदुओं पर फोकस करना होगा, जैसे सार्वजनिक सुरक्षा और एआई रेगुलेशंस, इससे जुड़ी मैक्रो-इकोनॉमिक्स और टैक्स नीतियां और एआई के सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाना। समय कम है, हमें फुर्ती दिखानी होगी। (darioamodei.com से साभार)