पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:अपने आप को सात्विक रूप से सक्रिय रखना आवश्यक

Jun 13, 2026 - 06:08
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:अपने आप को सात्विक रूप से सक्रिय रखना आवश्यक
सभी कहते हैं धैर्य रखो, लेकिन जब अवसर आता है तो धैर्य छूट जाता है। तब कुछ क्रियाएं है, जो अगर आप नियमित करें तो अपने-आप धैर्य का जन्म हो जाएगा। उनमें से एक है- कर्मकांड। पिछले दिनों मैं कोलकाता में कथा कर रहा था तो वहां मैंने अच्छे पढ़े-लिखे हाइटेक लोगों को कर्मकांड करते देखा। सात दिन तक वो रोज तीन घंटे कर्मकांड करते और फिर कथा सुनते। तो मैंने पूछा कि आप लोग जो तार्किक हैं, वो इतनी देर तक कर्मकांड करते हैं तो क्या मिलता है? ज्यादातर लोगों ने एक बहुत अच्छी बात बोली कि हमारे भीतर एक धैर्य का जन्म हो रहा है। उन लोगों का कहना था कि हम एक अलग दुनिया में डूब जाते हैं। पंडित जी मंत्रोच्चार कराते हैं, क्रियाएं कराते हैं। पहले तो लगता था अंधविश्वास है पर जब किया तो लगा यह प्रकृति से जुड़ने का ढंग है। तनाव कम हो रहा है। मेडिटेशन में भी मदद मिलती है। हम अधिक रचनात्मक होते हैं। शरीर को भी अनुशासन की ड्रिल मिलती है। तो क्यों न कर्मकांड करें और अपने को सात्विक रूप से सक्रिय रखें।