पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:कोई दुर्भाग्य इतना बड़ा नहीं होता कि सौभाग्य को पी जाए

May 29, 2026 - 06:10
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:कोई दुर्भाग्य इतना बड़ा नहीं होता कि सौभाग्य को पी जाए
कुछ लोगों ने गलत काम किया और एक बड़ी परीक्षा रद्द हो गई। अब बच्चे गलत कदम ना उठा लें। विद्रोह, घुटन, निराशा स्वाभाविक है। परीक्षा की साख तो दांव पर लग ही गई, अब बच्चों का जीवन दांव पर न लग जाए। युवा पीढ़ी को जब चोट लगती है तो प्रकृति भी आहत होती है। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन परिवारों की है, जिनके बच्चे इस घटना से टूट गए हैं। माता-पिता और घर के बड़े लोग बच्चों को एक बात समझाएं कि जीवन ‘सिंगल ऑप्शन’ नहीं होता। कोई दुर्भाग्य इतना बड़ा नहीं होता कि वह सौभाग्य को पी जाए। ऐसी घटनाओं से अपने सौभाग्य को विस्मृत न करें और अपने पुरुषार्थ को भूल न जाएं। इस दुनिया से दुष्ट कभी कम होंगे नहीं। धोखा देने वाले तो राम और कृष्ण को भी धोखा दे गए थे। इसलिए हम बच्चों को समझाएं कि फेल्योर की फीलिंग में पॉजिटिविटी खत्म न करें। बच्चों का मनोबल बढ़ाने के लिए एक सुझाव है। उन्हें हनुमान चालीसा से जोड़िए, क्योंकि हनुमान चालीसा हनुमान जी का शब्द अवतार है।