पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:परिवार के प्रति अपनापन फूल की गंध जैसा होता है

Aug 13, 2026 - 12:00
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:परिवार के प्रति अपनापन फूल की गंध जैसा होता है
हर नाव में छेद होता ही है। कोई छेद काम दिखा जाता है तो नाव को नुकसान हो जाता है। और कोई छेद सिर्फ छेद रह जाता है, पूरी जिंदगी नाव सकुशल चलती रहती है। हमारा परिवार भी नाव की तरह है, जो संसार के जल में चल रही है। पर नाव में छेद है। समझदार नाविक जब छेद से पानी आता है तो उस पानी को समय रहते बाहर उलीच देता है। हमारे परिवारों में भी भोग, विलास, दुर्गुणों का जल उस छेद से आएगा ही। लाख बच्चों का ध्यान रखने के बाद भी वो भटक सकते हैं और भटकने के लिए बच्चे-युवा ही क्या- बड़े-बूढ़े भी सन्मार्ग छोड़ देते हैं। ऐसे में परिवार का आनंद कैसे बना रहे? इसलिए समझदार नाविक की तरह सावधानी से पतवार चलाएं। सजगता से छिद्र पर नजर रखें। अतिरिक्त जल जो नाव में आ गया, उसे बाहर फेंकें। वर्ना पूरे जीवन ऐसा लगेगा कि नाव नदी में है, और बहुत देर बाद पता लगता है कि नदी नाव में आ गई तो डूबना ही है। इसलिए परिवार का आनंद, परिवार के प्रति अपनापन फूल की गंध की तरह होता है, जो दिखती नहीं पर खूब स्वाद देकर जाती है।