पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:प्रकृति को छेड़ेंगे तो वह अपना विपरीत ही आपको सौंपेगी
देर रात की पार्टियां अब महंगी पड़ रही हैं। इनमें नशे का खेल चल रहा है। मौज-मस्ती की आड़ में आनंद अनैतिक होता जा रहा है। नई पीढ़ी के बच्चे, जो रात की पार्टियां करते हैं, उनमें से कई के तो माता-पिता को मालूम भी नहीं कि देर रात ये कहां हैं। कुछ घरों में इन बच्चों के माता-पिता खुद ऐसी पार्टी कर रहे हैं। इस समय मिडिल-एज के माता-पिता के बच्चे जवान हो गए। वो अपने चरित्र में गम्भीरता नहीं ला पा रहे हैं। वो अभी भी अपने को उसी उम्र में समझ रहे हैं और उसमें आकर उनके बच्चे जुड़ गए। इसलिए समाज का दृश्य बड़ा विचित्र हो गया। मनोवैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि किशोर होने की उम्र 11 साल हो गई, जो पहले लगभग 15-16 साल थी। बच्चे उम्र से पहले जवान हो रहे हैं। अपोजिट जेंडर के प्रति उत्सुकता होना स्वाभाविक है। लेकिन अब नई बात निकलकर आई कि 11 वर्ष के किशोर भी जेंडर बदलने की तमन्ना रख रहे हैं। यह भी कुदरत से छेड़छाड़ है और प्रकृति को जब भी छेड़ा जाएगा, वह अपना विपरीत आपको सौंपेगी।