पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:स्वयं प्रयास करने पर सत्य की संभावना बढ़ जाती है
मशीन और मानवता का खुलेआम मुकाबला हो रहा है। विज्ञान की आंधी में मानवता बिजूके की तरह उड़ गई है। मानवीय प्रयास- जिसको हम लोग मैन्युअल कहते हैं- उसे करते समय हम सत्य के अधिक निकट होते हैं। जब आप स्वयं प्रयास करते हैं तो सत्य की संभावना जीवन में बढ़ जाती है, लेकिन जब मशीन पूरी तरह उतर आए तो असत्य को प्रवेश करने में आसानी होती है। हमारे देश की आधी आबादी झूठ की चपेट में है। बहुत सारे लोग जानबूझकर झूठ बोलते हैं, पर उससे ज्यादा लोग अनजाने में झूठ बोलते हैं। इसीलिए मनोवैज्ञानिक कहते हैं झूठ बोलना भी एक बीमारी है। झूठ बोलने से अगर बचना चाहें तो मानवता के निकट जाएं। सत्य, करुणा, अहिंसा, प्रेम, अपनापन, परहित की कामना- ये सब मिलकर मानवता है। एक बात और शास्त्रों में लिखी है कि जब शब्दों का अतिरिक्त उपयोग किया जाता है तो झूठ को अवसर मिल जाता है शब्दों में प्रवेश करने का। जुबान झूठ नहीं बोलती, जुबान के पीछे से मन झूठ बुलवाता है। तो बोलने का एक अभ्यास करिए कि प्रत्येक शब्द सत्य को स्पर्श करके निकले।