पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:हमारे परिवार सशक्त ही नहीं, एकजुट और संवेदनशील भी हों
भारत की एक ताकत है- परिवार-व्यवस्था। हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारे परिवार केवल सशक्त ही न हों, एकजुट और संवेदनशील भी हों। आजकल माना जाता है कि रोटी, कपड़ा और मकान उच्च स्तर के हों तो परिवार सशक्त हो गए। परिवार जिस घर में रहता है, उसमें मोटे तौर पर चार कक्ष होते हैं। बैठक कक्ष, शयन कक्ष, पूजा घर और रसोई घर। इसमें दो कक्ष हैं और दो घर हैं। घर में भी जो घर है, वह रसोई घर और पूजा घर ही हैं। अब जब आप अपने घर में इन चार कक्ष में रहें तो ध्यान दीजिएगा। बैठक कक्ष चेहरे की तरह होता है। यहां सिर्फ हम दिखते हैं, होते नहीं हैं। जैसे हम चेहरा सजा लेते हैं, ऐसे लोग बैठक कक्ष सजा लेते हैं। यहां बुद्धि का प्रयोग करिए। शयन कक्ष में 10 इंद्रियां सक्रिय रहेंगी, उनका नियंत्रण रखिए। रसोई घर में हृदय प्रधान हो और पूजा घर में मन को शुद्ध और शून्य बनाने का काम किया जाए। अगर यह हम व्यवस्थित कर लें तो जिस घर में हम रहते हैं, उसमें हमारा दाम्पत्य जीवन एकजुट और संवेदनशील भी होगा।