प्रो. चेतन सिंह सोलंकी का कॉलम:5 अक्षरों का यह फॉर्मूला क्लाइमेट बचाने की कुंजी साबित हो सकता है

May 20, 2026 - 06:05
प्रो. चेतन सिंह सोलंकी का कॉलम:5 अक्षरों का यह फॉर्मूला क्लाइमेट बचाने की कुंजी साबित हो सकता है
जलवायु परिवर्तन पर चर्चा तो आज हर जगह होती है, लेकिन कार्रवाई अकसर प्रतीकात्मक कदमों तक सीमित रह जाती है। ये प्रयास समस्या का केवल छोटा हिस्सा छूते हैं। जबकि असली कारण हमारा रोजमर्रा का आधुनिक जीवन है। हम कैसे ट्रैवल करते हैं, क्या खरीदते हैं, क्या खाते हैं, कितनी ऊर्जा इस्तेमाल करते हैं, ये सब कदम जाने-अनजाने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं और जलवायु परिवर्तन में योगदान देते हैं। अपने रोजमर्रा के जीवन में हम हर मिनट पर्यावरण को खराब करने का काम करते हैं और मनुष्य चाहते हैं कि हमारे द्वारा फैलाई गई सारी गंदगी को साफ करने का काम पेड़ों को करना चाहिए। बेचारे पेड़ हमारे लिए भला कितना पर्यावरण बचा सकते हैं? कई लोग मुझसे पूछते हैं कि यदि पेड़ लगाने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने, सोलर पैनल लगाने से भी पर्यावरण खराब होने से नहीं बच सकता तो हमें क्या करना चाहिए? इसलिए मैंने सरल, याद रखने लायक और 360 डिग्री को कवर करने वाला एक फॉर्मूला बनाया है। इसे मैं TUPEE (टुपी) कहता हूं। यह समझिए कि टुपी एक कैरेक्टर है, जो हमें दैनिक जीवन में याद दिलाता है कि पर्यावरण को ठीक करने के लिए हमें क्या करना चाहिए। TUPEE का फुल फॉर्म है : T या ट्रैवल लेस (कम यात्रा), U या यूज़ आइटम्स वाइज़ली (सामानों का समझदारी से उपयोग), P या पर्चेस कॉशियसली (सावधानी से खरीदारी), E या ईट केयरफुली (सजग भोजन) और E या एलिमिनेट इलेक्ट्रिसिटी वेस्ट (बिजली की बर्बादी खत्म करना)। ये पांच क्षेत्र हमारे जीवन के लगभग पूरे कार्बन फुटप्रिंट को कवर करते हैं। इनमें से प्रत्येक क्षेत्र से, ग्लोबल लेवल पर लगभग 20 से 25% कार्बन उत्सर्जन होता है। यानी अगर हम इन पांचों में सुधार करें, तो अपने दैनिक जीवन में काफी हद तक पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित कर सकते हैं। सबसे पहले, टी की बात करें। परिवहन वैश्विक उत्सर्जन का बड़ा हिस्सा है। हर अनावश्यक यात्रा ईंधन जलाती है और कार्बन बढ़ाती है। इस बार गर्मी की छुट्टी में लंबी दूरी की यात्रा न करें। 4-5 लोगों का परिवार यदि लंबी दूरी की यात्रा छुट्टी मनाने के लिए करता है तो लगभग 2-3 पेड़ों को काटने के बराबर कार्बन उत्सर्जन करता है। इसकी गणना ऐसी लाखों यात्राओं के हिसाब से कर लीजिए। और हां, छोटी या एकाध किमी की दूरी के लिए या तो पैदल ही चलें या साइकिल का उपयोग करें। दूसरा, यू। सिंगल-यूज़ आइटम का उपयोग न करें। हम चीजें जल्दी बदलते हैं- कपड़े, गैजेट, फर्नीचर। इनके निर्माण में ऊर्जा, पानी और संसाधन लगते हैं। हर उत्पाद का अपना कार्बन होता है। यदि हम वस्तुओं का जीवनकाल बढ़ाएं, मरम्मत करके पुन: उपयोग करें, तो व्यापक प्रभाव वाले इस क्षेत्र में कमी ला सकते हैं। तीसरा, पी। जरूरत और इच्छा में फर्क करना आज सबसे बड़ा जलवायु कदम है। हर नई खरीद उत्पादन, पैकेजिंग और परिवहन की मांग पैदा करती है। जितना हो सके, नई खरीदारी को टालते जाएं। एक, दो या छह महीने तक आगे बढ़ा दें। चौथा, ई। आधुनिक मनुष्य का खाना भी खतरनाक हो गया है। केवल हमारे भोजन के कारण विश्व का लगभग 25% कार्बन उत्सर्जन होता है। स्थानीय या मौसमी भोजन ही करें। फ्रिज के सामान का कम से कम उपयोग करें। पांचवां भी ई। बिजली उत्पादन- खासकर कोयले से- कार्बन उत्सर्जन का बड़ा स्रोत है। अनावश्यक लाइट और उपकरण बंद करना, एसी की टेम्परेचर सेटिंग 26 डिग्री पर रखना और एनर्जी ऐफिशिएंट 5 स्टार उपकरण ही अपनाना, चाहे वे थोड़े महंगे क्यों न हों। ये इसके उपाय हैं। समाधान रोजमर्रा के जीवन में ही है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)