यूरोप भीषण हीटवेव की चपेट में: 'हीट डोम' बना तबाही की वजह, रिकॉर्ड तापमान से जनजीवन अस्त-व्यस्त
यूरोप: यूरोप इस समय दशकों की सबसे भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। स्पेन, पुर्तगाल, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन सहित कई देशों में तापमान नए रिकॉर्ड बना रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस विनाशकारी हीटवेव की मुख्य वजह वायुमंडल में बना एक विशाल 'हीट डोम' (Heat Dome) है, जिसने पूरे क्षेत्र को भट्टी में बदल दिया है।
हीट डोम कैसे बना गर्मी का कारण?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, हीट डोम उच्च वायुदाब (High Pressure) का एक शक्तिशाली क्षेत्र होता है, जो गर्म हवा को एक स्थान पर ढक्कन की तरह कैद कर देता है। इस दौरान ऊपर से नीचे की ओर दबने वाली हवा सिकुड़ती है और उसका तापमान तेजी से बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप कई दिनों तक लगातार भीषण गर्मी बनी रहती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचता है और हवा में आर्द्रता (Humidity) अधिक होती है, तब शरीर को महसूस होने वाला वास्तविक तापमान (Feel-like Temperature) 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे हीटस्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई समस्या
यह हीटवेव स्पेन और पुर्तगाल से शुरू होकर अब पूर्वी यूरोप तक फैल चुकी है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण ऐसी चरम गर्मी की घटनाएं पहले की तुलना में अधिक बार और अधिक तीव्रता से देखने को मिल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जलवायु परिवर्तन नहीं होता तो जून महीने में इतनी भीषण गर्मी पड़ने की संभावना बेहद कम होती।
फ्रांस में रिकॉर्ड तापमान, हजारों लोगों पर असर
फ्रांस में गर्मी ने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पिसोस (Pissos) शहर में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव है और बड़ी संख्या में लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। सबसे अधिक खतरा बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर देखा जा रहा है।
जर्मनी में जंगलों की आग और विस्फोट
जर्मनी में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पूर्वी जर्मनी के कई इलाकों में जंगलों में भीषण आग लग गई। आग दूसरे विश्व युद्ध के पुराने गोला-बारूद भंडार तक पहुंचने के कारण कई विस्फोट हुए, जिसके बाद प्रशासन को आसपास के क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा।
गर्मी से प्रभावित हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर
अत्यधिक तापमान का असर केवल लोगों के स्वास्थ्य पर ही नहीं बल्कि बुनियादी ढांचे पर भी दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर हाईवे की सड़कें टूटने लगी हैं, जबकि रेलवे पटरियों के फैलने से ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं। कई रूटों पर ट्रेनों की गति कम करनी पड़ी या सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गईं।
ब्रिटेन में पहली बार लगातार रेड अलर्ट
ब्रिटेन में पहली बार लगातार तीन दिनों तक 'रेड एक्सट्रीम हीट वार्निंग' जारी की गई है। हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामलों में तेजी से वृद्धि होने के कारण कई अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है और कुछ क्षेत्रों में मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति बन गई है।
हीटवेव से कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सलाह के अनुसार, अत्यधिक गर्मी के दौरान कुछ सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है।
- प्यास न लगने पर भी नियमित अंतराल पर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- ORS, नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय पदार्थों का सेवन करें।
- दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें।
- हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें तथा सिर को टोपी या छाते से ढककर रखें।
- बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें।
- बच्चों या पालतू जानवरों को कभी भी धूप में खड़ी बंद गाड़ी में अकेला न छोड़ें।
बढ़ती गर्मी दे रही है चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप में पड़ रही यह भीषण गर्मी केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का संकेत है। यदि वैश्विक तापमान में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घातक हीटवेव और भी अधिक सामान्य हो सकती हैं। ऐसे में सरकारों के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी सतर्क रहना और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाना बेहद जरूरी है।