रघुराम राजन का कॉलम:बहुत सारे नए रोजगार भी क्रिएट करेगा एआई
तो क्या एआई हमारी नौकरियां खाने जा रहा है? अभी तो कोई नहीं जानता कि यह कितनी तेजी से होगा, कितना व्यापक होगा और इसका सबसे अधिक असर किन सेक्टर्स पर पड़ेगा। बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग कंपनियां इस तकनीक को अपने कामकाज में कितनी तेजी से लागू करती हैं। अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के हालिया बिजनेस ट्रेंड्स एंड आउटलुक सर्वे के अनुसार, 20 से कम कर्मचारियों वाली केवल 20% कंपनियां ही वर्तमान में एआई का इस्तेमाल करती हैं, जबकि कम से कम 250 कर्मचारियों वाले 37% बिजनेसों में एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी बड़ी कंपनियां इस तकनीक का अधिक उपयोग कर रही हैं, लेकिन 37% का आंकड़ा भी कम ही है। फिलहाल, एआई को अपनाने की राह में एक बड़ी बाधा यह है कि पहले से ही असाधारण क्षमताओं वाली इस तकनीक को मौजूदा वर्कफ्लो में इस तरह से कैसे समायोजित करें कि कंपनियां उसका पूरा लाभ उठा सकें। इसके लिए ऐसे मॉडल जरूरी हैं, जो न केवल मौजूदा डेटा पर प्रशिक्षित हों, बल्कि रोजमर्रा के इस्तेमाल से पैदा होने वाले नए डेटा के प्रति एडाप्टिव भी हों। एआई को अपनाने में बाधा डालने वाला एक अन्य फैक्टर लागतों को लेकर अनिश्चितता है। कई बड़ी कंपनियां अभी भी पायलट प्रोजेक्ट चला रही हैं और नियुक्ति या छंटनी के फैसले टाल रही हैं, क्योंकि वे स्थिति के और स्पष्ट होने का इंतजार कर रही हैं। लेकिन प्रतिस्पर्धात्मक दबाव उन्हें इस तकनीक को अपनाने के लिए मजबूर करेगा ही। इसके बावजूद, रोजगार के लिहाज से भविष्य पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। अगर कंपनियां वही वस्तुएं बनाती और वही सेवाएं उपलब्ध कराती रहती हैं- जो वे अभी करती हैं- तो एआई को अपनाने का प्रभाव वही होगा, जो किसी भी नई तकनीक का होता है। हां, कुछ नौकरियां जरूर गैर-जरूरी हो जाएंगी, लेकिन कुछ अधिक प्रोडक्टिव और दिलचस्प भी होंगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि एआई ऊबाऊ और दोहराव वाले कामों को कम करेगा और उन कामों में मदद करेगा, जिन्हें इंसान ज्यादा अच्छी तरह से नहीं कर पाते हैं। साथ ही, नई नौकरियां भी पैदा होंगी- जैसे एआई इंजीनियरों की, जो इस तकनीक के इंप्लीमेंटेशन की निगरानी करेंगे। इसके अलावा, अगर एआई को अपनाने की वजह प्रोडक्टिविटी में वृद्धि है (यह नहीं कि यह मानव-श्रम की तुलना में सस्ता पड़ता है), तो कंपनियों की कम लागत में अधिक उत्पादन करने की क्षमता उन्हें कीमतें घटाने और बिक्री बढ़ाने में सक्षम बनाएगी। यह प्रसिद्ध जेवन्स-इफेक्ट है और इससे रोजगार भी बढ़ने चाहिए। आशावादी होने का एक और कारण यह है कि एआई नए बिजनेस खड़े करने में मदद कर सकता है। मान लीजिए कि कोई व्यक्ति फर्नीचर बनाने का कारोबार शुरू करना चाहता है, लेकिन वह इसलिए हिचकिचाता है क्योंकि इसके लिए उसे एक वेब-प्रोग्रामर और अकाउंटेंट की जरूरत है। अगर एआई ये दोनों भूमिकाएं निभा सके, तो शायद वह काफी कम लागत में एकल स्वामित्व वाला व्यवसाय शुरू कर सकता है। महामारी के दौरान स्टार्टअप की संख्या पहले ही काफी बढ़ गई थी और हाल की तिमाहियों में इसमें और वृद्धि हुई है। अर्थशास्त्री डेविड ऑटर बताते हैं कि एआई मध्यम कौशल वाले कामगारों को हाई-स्किल्स से लैस कर सकता है। इसका उदाहरण कोई नर्स प्रैक्टिशनर है, जो मेडिकल एआई की मदद से कहीं अधिक बीमारियों की पहचान और इलाज कर सकती है। दुनिया भर में चिकित्सा-सेवाओं की भारी मांग को देखते हुए इस क्षेत्र में नए रोजगार पैदा करने की काफी गुंजाइश है। यह समझते हुए कि एआई के कारण नौकरियों के संकट का पहला दौर आखिरी नहीं होगा, कंपनियों को समय-समय पर कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने और जहां तक संभव हो, उन्हें नौकरी पर बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत होगी। सरकारें कर्मचारियों को दिए जाने वाले अतिरिक्त प्रशिक्षण के लिए टैक्स-क्रेडिट पर विचार कर सकती हैं, जिसमें कर्मचारी के काम पर बने रहने पर हर साल प्रशिक्षण की लागत का एक-तिहाई इस्तेमाल किया जा सके। अगर सरकार ऐसी नीति एआई अपनाने वाली कंपनियों पर लागू करना चाहती है, तो वो यह भी कर सकती है कि इस क्रेडिट का इस्तेमाल केवल टोकन टैक्स की भरपाई के लिए हो। हालांकि, कर-प्रोत्साहनों से भी अधिक महत्वपूर्ण यह होगा कि कंपनियां स्वीकारें वे अपने कर्मचारियों को अनिश्चित भविष्य से निपटने में मदद करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। जैसे-जैसे रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढ़ेगी, सबसे योग्य और प्रतिभाशाली लोग भी ऐसे एम्प्लॉयर के यहां नौकरी स्वीकार करने को लेकर चिंतित हो सकते हैं, जो जब चाहे उन्हें नौकरी से निकाल सकता है। जो एम्प्लॉयर अपने कर्मचारियों को सहयोग देने का वादा करेंगे, उन्हें अंततः एक अतिरिक्त लाभ भी मिल सकता है : उनकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी तो उनके पास चुनने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उम्मीदवारों का एक बड़ा पूल होगा। भविष्य निराशाजनक नहीं है... रोजगार के लिहाज से भविष्य पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। एआई को अपनाने का प्रभाव वही होगा, जो किसी भी नई तकनीक का होता है। कुछ नौकरियां जरूर गैर-जरूरी हो जाएंगी, लेकिन कुछ अधिक प्रोडक्टिव भी होंगी। नई नौकरियां भी पैदा होंगी- जैसे एआई इंजीनियरों की।