विवेक बद्रीनाथ का कॉलम:चंद भाषाओं में प्रशिक्षित एआई सबके लिए कैसे कारगर होगा?

Jul 28, 2026 - 12:15
विवेक बद्रीनाथ का कॉलम:चंद भाषाओं में प्रशिक्षित एआई सबके लिए कैसे कारगर होगा?
एआई के सुरक्षागत और सैन्य जोखिमों के बारे में तो बहुत कुछ कहा जा चुका है। लेकिन गिनी-चुनी भाषाओं में प्रशिक्षित और चंद बहुराष्ट्रीय कंपनियों के स्वामित्व वाले लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (एलएलएम) द्वारा उत्पन्न सांस्कृतिक और आर्थिक खतरों को काफी हद तक अनदेखा किया गया है। इन एलएलएम का बाजार में प्रभुत्व हाशिये की भाषाओं वाले विकासशील देशों को काफी नुकसान में डाल देता है। जब से ओपनएआई ने नवम्बर 2022 में चैटजीपीटी जारी किया है, इंडस्ट्री-लीडर्स और नीति-निर्माताओं ने उत्पादकता में वृद्धि की एआई की क्षमताओं की प्रशंसा की है। लेकिन इसके लाभ सब तक समान रूप से नहीं पहुंचते हैं। कई विकासशील अर्थव्यवस्थाएं इन एआई सिस्टम्स तक उनके भाषा संबंधी पूर्वग्रहों के कारण नहीं पहुंच पाती हैं। अधिकांश एलएलएम को दुनिया में बोली जाने वाली 7,000 से अधिक भाषाओं में से केवल लगभग 100 पर ही प्रशिक्षित किया जाता है, और इसमें इस्तेमाल होने वाले लगभग सभी डेटा का स्रोत अंग्रेजी सहित चीनी, स्पैनिश, फ्रेंच और जर्मन ही हैं। लेकिन दुनिया में केवल 40 करोड़ लोग ही मूलत: अंग्रेजीभाषी हैं और वैश्विक आबादी का केवल 25% हिस्सा ही उपरोक्त ‘बिग फाइव’ में से किसी एक को अपनी पहली भाषा के रूप में बोलता है। यह असंतुलन अल्पकाल में भले ही महज सांस्कृतिक और आर्थिक अलगाव का कारण बनता हो, लेकिन दीर्घकाल में यह कई देशों के विकास को बाधित कर सकता है तथा भाषाई विविधता को कम कर सकता है। एक विडम्बना यह भी है कि अमीर देशों ने जिस तेजी से एआई को अपनाया है, उसने विकासशील देशों के यूजर्स के लिए इंटरनेट तक पहुंचना और डिजिटल उपकरणों से लाभान्वित होना कठिन बना दिया है। एआई-संचालित चिप की मांग ने स्मार्टफोन की लागत भी बढ़ा दी है, जिससे वे लाखों लोगों की पहुंच से बाहर हो गए हैं। एलएलएम को स्थानीय भाषाओं और संस्कृतियों को बेहतर ढंग से दर्शाना चाहिए। नहीं तो समुदायों के सामने अपनी अनूठी शब्दावलियों को खोने का खतरा होगा। ये शब्दावलियां ऐतिहासिक घटनाओं, बड़े पैमाने पर माइग्रेशन और राजनीतिक विरासतों से गढ़ी गई हैं। एआई सिस्टम्स में भाषाई विविधता की कमी उनके एडॉप्शन की गति को भी धीमा कर देगी। पेरू में डिजिटल वित्तीय सेवाओं को उपभोक्ताओं के लिए प्रासंगिक होने के लिए आम बोलचाल की भाषा में संवाद करना होगा। वियतनाम में ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा को अच्छा इलाज करने के लिए उस स्पष्टता की आवश्यकता होगी, जो केवल स्थानीय भाषा का एक मॉडल ही प्रदान कर सकता है। मोबाइल नेटवर्क ऑपरेटर (एमएनओ) अपने डेवलपर्स की बड़ी संख्या और डेटा-प्रोसेसिंग क्षमताओं के कारण स्थानीय भाषा मॉडल बनाने के लिए एक अनूठी स्थिति में हैं। वे लाइसेंस प्राप्त और विश्वसनीय सरकारी भागीदार भी हैं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि हाशिये की भाषाओं के लिए एलएलएम बनाने में एक प्रमुख बाधा प्रशिक्षण-डेटा की कमी है। इसका समाधान सरकारों के पास मौजूद विशाल मात्रा के डेटा में निहित है, जो आमतौर पर संवेदनशील और गोपनीय होता है। उदाहरण के लिए, यूक्रेन के सबसे बड़े एमएनओ कीवस्टार ने वहां का पहला राष्ट्रीय एलएलएम विकसित करने के लिए डिजिटल परिवर्तन मंत्रालय के साथ एक साझेदारी बनाई, जिसे यूक्रेनी के साथ-साथ वहां बोली जाने वाली अन्य भाषाओं- रूसी, बल्गेरियाई और क्रीमियन तातार के लिए अनुकूलित किया गया था। ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन- जिसका मैं महानिदेशक हूं- अफ्रीकी एआई भाषा मॉडल परियोजना के जरिये नाइजीरिया, मेडागास्कर, टोगो और कांगो गणराज्य सहित सब-सहारन अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में इसी तरह की रणनीति अपना रही है। यह पहल महाद्वीप के छह एमएनओ- एयरटेल, एक्सियन टेलीकॉम, एथियो टेलीकॉम, एमटीएन, ऑरेंज, वोडाकॉम और अन्य टेलीकॉम कंपनियों, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के व्यक्तियों, शिक्षाविदों और सिविल सोसायटी समूहों को अफ्रीकी भाषाओं के लिए एलएलएम बनाने के लिए एक साथ ला रही है। हमें एआई के उपयोगों को लेकर व्यापक दृष्टि रखनी होगी। दुनिया अब एजेंटिक एआई की ओर बढ़ रही है। बैंकिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा सम्बंधी डिजिटल सेवाएं यूजर्स की सहायता के लिए तेजी से एआई को अपना रही हैं। ऐसे में भाषा के आधार पर कोई देश इनमें पिछड़ जाएं तो ये बहुत गलत होगा। (@प्रोजेक्ट सिंडिकेट)