एन. रघुरामन का कॉलम:म्यूजिक सीखना तनावपूर्ण हालात का इलाज बन सकता है
जॉन और उनकी पत्नी मैरी (दोनों परिवर्तित नाम) में से किसी के पास भी घर में छोटे-मोटे रिपेयर करने का कौशल नहीं था। इस रिटायर्ड कपल के पास पर्याप्त आमदनी है और घर में रिपेयरिंग को लेकर उन्हें ‘मिस्टर फिक्स-इट’ बनने में कोई रुचि नहीं है। लेकिन जब भी कोई छोटी समस्या आती, मसलन कोई डोर लॉक बदलना हो, टॉयलेट फ्लश काम न करे या गर्मियों में सीलिंग फैन धीमा चलता महसूस हो तो जॉन ऐसे कामचलाऊ उपाय निकालते, जिन्हें वे ‘समस्या ठीक करना’ कहते थे। वे मैरी से कहते, ‘अगर तुम टॉयलेट हैंडल खास तरीके से हिलाओ तो दिक्कत नहीं होगी।’ समस्या की गंभीरता के मुताबिक यह कपल घंटों, दिनों या हफ्तों तक ऐसे ही काम चलाता रहता। जब मैरी को लगता कि ‘अब यह काम नहीं चलेगा’ तो वे किसी प्रोफेशनल को बुला लेतीं। और तब जॉन गुस्सा होकर तमाशा खड़ा कर देते। वे मैरी को भ्रमित करने की कोशिश करते कि सब ठीक है। लेकिन जॉन के विरोध के बीच ही मैरी प्रोफेशनल को बुला लेतीं, जबकि जॉन की इच्छा रहती कि मरम्मत कुछ घंटों या दिनों तक टल जाए। हालांकि, जब रिपेयर करने वाला आता तो जॉन अच्छा व्यवहार करते और काम पूरा होने पर उसे स्वीकार भी लेते। लेकिन समस्या और समाधान के बीच मैरी को बहुत एंग्जायटी और बेवजह का तमाशा झेलना पड़ता। इससे माहौल और तनावपूर्ण हो जाता। फिर एक थेरेपिस्ट ने सुझाव दिया और दो महीने बाद मैरी की समस्या गायब हो गई, जिससे वह बीते एक दशक से जूझ रही थीं। मैरी ने थैरेपिस्ट को बताया कि स्कूली दिनों में जॉन वायलिन सीखते थे, लेकिन कुछ क्लास के बाद बंद कर दिया। 1970 के दशक में जॉन जिस क्लास में जाते थे, उसी ने 2013 में जब वयस्क, खासकर वरिष्ठजनों के लिए बैच शुरू किया तो थेरेपिस्ट ने जॉन को सूटकेस से अपना वायलिन निकालने के लिए प्रेरित किया और वह दो माह की रेजिडेंशियल क्लास के लिए चले गए। जॉन के लिए वह क्लास वैसी ही थी, जैसी 50 साल पहले होती थी। अमेरिका में वयस्कों के लिए कई तरह के समर म्यूजिक प्रोग्राम उपलब्ध हैं। जॉन जैसे कैंपर्स के लिए ये प्रोग्राम उनकी युवावस्था के संगीत से जुड़े अनुभवों को फिर से जीने और नए सामाजिक संबंध बनाने का मौका देते हैं। भावनात्मक रूप से संगीत रचना आत्मा के लिए बेहतर होता है। इससे जॉन क्रिएटिव बने। उन्हें खुद के लिए पसंद का संगीत रचने का मौका मिला और मनोबल भी बढ़ा। मानसिक रूप से यह रिसर्च दिखाती है कि कोई वाद्य यंत्र सीखना और बजाना दिमाग में बेहतर न्यूरोलॉजिकल कनेक्शन बनाने में मदद करता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि ‘यह डिमेंशिया दूर रखने में मदद कर सकता है। जब आप मिल कर संगीत बजाते हैं तो जीवन की छोटी-मोटी बातों से ऊपर उठ जाते हैं और यह किसी के भी लिए सबसे बेहतर आध्यात्मिक अनुभव होता है।’ जॉन की म्यूजिक क्लास ट्रिप के दौरान ही मैरी ने बिना उन्हें बताए घर की सारी चीजें रिपेयर करवा लीं। लौटने पर जॉन खुश हुए और इससे दोनों को तनाव भी कम हुआ। ये समर म्यूजिक प्रोग्राम प्लेइंग एबिलिटी के अनुसार अलग-अलग होते हैं, जैसे बिगिनर्स, इंटरमीडिएट और एडवांस। ‘म्यूजिकल अमेरिका वर्ल्डवाइड’ और ‘द इंस्ट्रूमेंटलिस्ट्स’ जैसी कुछ संस्थाओं में तो हमारी पुरानी टेलीफोन डायरेक्टरी जैसी गाइड्स भी उपलब्ध होती हैं। कुछ कैंप में दादा और पोता-पोती एक साथ स्टूडेंट होते हैं, क्योंकि वो दोनों ही बिगिनर होते हैं। कुछ कैंप में तो 60 पार के बुजुर्गों की भागीदारी दोगुनी हो गई है और उन्हें लगता है कि कैंप में बना सामाजिक जुड़ाव बहुत अहम है। फंडा यह है कि चूंकि आजकल कई लोगों की जिंदगी में सामाजिक जुड़ाव कम होता जा रहा है, इसलिए किसी को भी घर के बाहर मिले ऐसे अवसर का लाभ उठाना चाहिए। क्योंकि वहां साझा रुचि वाले नए लोगों से जुड़ा जा सकता है और इसका हमारी सेहत और बढ़ती उम्र पर सकारात्मक असर पड़ता है।