पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:एआई सक्रिय हो जीवन में, लेकिन हम लाचार भी न हों
जब श्रीराम ने युद्ध के पहले अंगद को दूत बनाकर रावण के पास भेजा तो एक बहुत अच्छी बात उन्होंने बोली थी- अंगद, रावण से तुम्हारा व्यवहार इस प्रकार होना चाहिए कि "काजु हमार तासु हित होई।' हमारा भी काम हो जाए, उसका भी भला हो जाए। अब हम एआई के युग में इस पंक्ति का अर्थ समझकर जीवन में उतारें। एआई भी सक्रिय हो हमारे जीवन में, लेकिन हम लाचार भी न हो जाएं। कहीं ऐसा न हो कि हम कब खाएं, कब नहाएं, यह निर्णय भी एआई करने लगे। प्रबंधन की भाषा में इसको आपसी बढ़त कहते हैं- म्युचुअल एम्प्लीफिकेशन, यानी दोनों का हित हो। यंत्र का भी हित हो और यंत्र का प्रयोग करने वाले मनुष्य का भी। एआई के पहले हमारे यहां एक लहर चली थी, उसको कहते हैं विशेषज्ञता की लहर। हर क्षेत्र में लोग विशेषज्ञ हो रहे थे। अब यह एआई विशेषज्ञता पर बहुत बड़ा हमला करेगा, क्योंकि विशेषज्ञ होने में जो मेहनत, जो संघर्ष करना पड़ता था, वो अब बंद हो जाएगा। और कहीं हम लोग चिंतन के मामले में आत्मसमर्पण न कर दें। एआई के सामने इतनी सावधानी जरूर रखिएगा।