पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:दिनभर में कुछ शब्द ऐसे बोलें, जो अत्यंत मोहक हों

May 7, 2026 - 06:05
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:दिनभर में कुछ शब्द ऐसे बोलें, जो अत्यंत मोहक हों
इन दिनों अधूरे, अमर्यादित वाक्यांशों को हथियार बनाकर ऑनलाइन लड़ाइयां लड़ी जा रही हैं। कुछ लोग तो डिजिटल मीडिया पर शब्दों को फांसी के फंदे पर चढ़ाने का ही काम कर रहे हैं। हमारे देश के भविष्य के लिए जो आदर्श दृश्य तैयार किया जा रहा है, उसमें अभी से शब्दों की गरिमा बचाने का प्रयास किया जाना चाहिए। वरना भ्रष्टाचार मुक्त सरकार, जवाबदेह नौकरशाह, संस्कार आधारित समाज, मूल्य आधारित परिवार, नैतिक धर्म जगत, जागरूक जनता और विश्वगुरु राष्ट्र- ये सब सपना ही रह जाएंगे। संयोग से आज रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। 165 साल हो गए, लेकिन उनके शब्दों में आज भी पूजित भाव है। दो देशों के राष्ट्रगान आज भी उनके नाम पर हैं। उनका एक-एक शब्द आत्मा को स्पर्श करके निकलता है। कोई व्यक्ति ऐसे ही जन, गण और मन को अपने शब्द नहीं दे सकता। इस समय जब भाषा दांव पर लगी है, हम कम से कम टैगोर जी से ये सीखें कि दिनभर में कुछ शब्द ऐसे बोलें, जो अत्यंत मोहक, मनोहर, सम्मोहक और रमणीय हों।