पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:जीवन में हर कर्म को योग और यज्ञ की तरह लेना आवश्यक

Oct 24, 2026 - 08:00 - 08:00  150
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:जीवन में हर कर्म को योग और यज्ञ की तरह लेना आवश्यक
आजकल प्रबंधन की भाषा में कहा जाता है कि जो भी काम करो, उसमें युद्ध की तरह कूद जाओ। जीतना ही है, ऐसा माद्दा रखो। महाभारत में भीष्म ने दुर्योधन से कहा था कि तुम रोज इसलिए हार जाते हो क्योंकि तुम युद्ध कर रहे हो और पांडव यज्ञ कर रहे हैं। अगर हम ऋषि-मुनियों की सुनें तो वो कहते हैं कि जीवन में हर कर्म को यज्ञ की तरह लो। और इसके लिए योग से जुड़ना पड़ेगा। कथा है कि गोरखनाथ ने नेपाल के राजा से दूध मांगा और जैसे ही दूध पिया, राजा के हाथ पर थूक दिया। राजा ने हाथ पीछे किए तो दूध पैर पर गिरा। गोरखनाथ ने कहा कि राजा यदि तुम दूध को हाथ पर लेते तो योगियों की तरह इंद्रियों के स्वामी होते। पर तुमने पैर पर ले लिया तो भू-स्वामी हो गए। तो राजाओं को भी योग और योगियों से जुड़े रहना चाहिए। और हर वो आदमी राजा है, जो आज सफलता की खोज में निकला है। इसलिए थोड़ा समय योग-यज्ञ के लिए निकालिए। फिर आप जिस भी भौतिक यात्रा पर हों, स्थितियां आपकी मदद ही करेंगी।