पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:सुबह उठा कैसे जाए, इस पर बड़ी गम्भीरता से काम करिए
श्रीराम और रावण के युद्ध के सातवें दिन एक ऐसी घटना घटती है, जो हमें चेतावनी और समझ, दोनों देती है। इस दिन जब रावण युद्ध में आया तो तुलसीदासजी ने लिखा- भोरु भएँ रथ चढ़ पुनि धावा। सुबह होने पर रावण रणांगण में रथ पर चढ़कर आया। रावण दुर्गुणों का प्रतीक है। हमारे जीवन में सुबह-सुबह भी दुर्गुणों का प्रवेश होता है। इसलिए सुबह उठा कैसे जाए, इस पर बड़ी गम्भीरता से काम करिए। उठते समय हनुमान चालीसा का स्मरण अवश्य करें। इसी का प्रयोग 19 अक्टूबर को जयपुर में किया जा रहा है। महापर्व के नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में हनुमान चालीसा का पूरे विश्व में सामूहिक पाठ हो, ऐसा आह्वान किया जाएगा। सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ी संख्या में लोग जुड़ेंगे। हनुमान चालीसा का महापाठ हमें समझाएगा कि नजरें तो सबके पास रहती हैं, असल बात तो नजरिए की है। जो रावण किसी से नहीं डरा, वह हनुमान जी से बहुत डरता था। इसीलिए हनुमान चालीसा दुर्गुणों के मामले में हमारे लिए कवच बन जाएगी।