बरखा दत्त का कॉलम:विमानों में उड़ान भरना अब पहले जैसा नहीं रह जाएगा

Oct 7, 2026 - 04:00 - 16:00  721
बरखा दत्त का कॉलम:विमानों में उड़ान भरना अब पहले जैसा नहीं रह जाएगा
पिछले सप्ताह हमने एविएशन की दुनिया में एक असाधारण घटना देखी। इसके बाद उड़ान का अनुभव हवाई यात्राएं करने वालों के लिए पहले जैसा नहीं रह जाएगा। घटना से जुड़े तथ्य इतने नाटकीय हैं कि अगर हमने यही सब किसी फिल्म में घटते हुए देखा होता तो शायद इसे अवास्तविक और अविश्वसनीय कहकर खारिज कर देते। लेकिन इसीलिए तो कहा जाता है कि सच्चाई हमेशा कल्पना से ज्यादा विचित्र होती है। तेल अवीव जा रहे फ्लाईदुबई के विमान में हवा के बीच पैदा हुआ संकट एक अकल्पनीय त्रासदी में बदल सकता था। एक समय तो विमान इतनी तेजी से नीचे गिर रहा था कि वह 30 सेकंड से भी कम समय में 14,000 से 17,000 फीट नीचे आ गया था। इस रफ्तार से नीचे गिरते हुए 173 यात्रियों और छह चालक दल के सदस्यों वाले इस विमान को दुर्घटनाग्रस्त होने में सिर्फ 30 सेकंड और लगते। लेकिन विमान के कमांडर और भारतीय नागरिक कैप्टन स्मित माछर के असाधारण धैर्य और संकट के बीच तुरंत सही प्रतिक्रिया देने की क्षमता ने जिंदगी और मौत के बीच फर्क पैदा किया। अब प्रधानमंत्री मोदी से लेकर बेंजामिन नेतन्याहू तक, पूरी दुनिया उन्हें नायक के रूप में सलाम कर रही है। भीषण दबाव की उस स्थिति में स्मित ने तीन ऐसे काम किए, जिन्हें देखकर दुनिया उनकी सूझबूझ और हिम्मत की कायल है। जब उनके सह-पायलट ने उन पर अप्रत्याशित हमला किया, तब भी उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होंने पहले आपातकालीन चेतावनी भेजी और फिर विमान के हाईजैक होने का संकेत देने वाला स्क्वॉक कोड प्रसारित किया। यह बहुत मायने रखता था। बहुत सारा खून बहने के बावजूद स्मित कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। यही निर्णायक मोड़ था। इससे केबिन में मौजूद यात्रियों को संकट का पता चला और वे कॉकपिट में घुस गए। उन्होंने हमलावर को काबू में किया और कैप्टन स्मित को प्राथमिक उपचार दिया। प्रधानमंत्री मोदी के साथ वीडियो कॉल में स्मित ने बताया कि विमान तेजी से नीचे जा रहा था और उन्हें पता था कि यात्रियों को बचाने के लिए उनके पास कुछ ही क्षण हैं। सह-पायलट की पहचान हमाम अल-हम्मामी के रूप में की गई है। इससे पहले उसके चरमपंथी विचारों के कारण ओमान एयर ने उस पर उड़ान भरने से रोक लगा दी थी। इसके बावजूद उसे फ्लाईदुबई में नौकरी दे दी गई और साफ तौर पर सुरक्षा संबंधी पर्याप्त जांच-पड़ताल नहीं की गई। ओमानी सह-पायलट ने स्मित पर क्रैश ऐक्स से हमला किया था। यह यात्री-विमानों के कॉकपिट में अनिवार्य रूप से रखा जाने वाला सुरक्षा उपकरण है। इसे इस तरह बनाया जाता है कि इसके धातु काटने वाले नुकीले हिस्सों की मदद से दुर्घटना या किसी आपात स्थिति में विमान के दरवाजे जाम हो जाने पर एल्युमिनियम, विमान के ढांचे और पैनलों को काटकर रास्ता बनाया जा सके। यह बिजली के उन तारों को भी काट सकता है जिनमें करंट प्रवाहित हो रहा हो। लेकिन यहां इसी औजार को हत्या का हथियार बना दिया गया। अगर फ्लाईदुबई की यह घटना किसी बड़े हादसे में बदल जाती, तो जरा कल्पना करें कि आज जिस भारतीय पायलट को नायक कहा जा रहा है, बहुत मुमकिन है कि पश्चिमी मीडिया उसी को इस हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराता। हमने एयर इंडिया 171 हादसे में भी कुछ ऐसा ही देखा था, जब बिना किसी सबूत के कैप्टन सुमित सभरवाल को दोषी ठहरा दिया गया था। फिलहाल तो कैप्टन स्मित एक तरह के कल्ट-फिगर बन गए हैं। जिन यात्रियों से मैंने बात की है, उनका कहना है कि वे सिर्फ भारतीयों ही नहीं, पूरी दुनिया के लिए एक नायक हैं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत के दौरान उनकी आंखों में आंसू आ जाना उन्हें लोगों के लिए और भी सहज और वास्तविक बनाता है। लेकिन एक बात तो तय है- अब विमानों में उड़ान भरना पहले जैसा नहीं रहेगा। 9/11 के बाद सुरक्षा के कई नए उपाय लागू किए गए थे, जिन्होंने एविएशन की दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया। यह ऐसा ही दूसरा ऐतिहासिक और निर्णायक मोड़ है। 9/11 के बाद तमाम सुरक्षा उपायों का मुख्य जोर कॉकपिट को सुरक्षित बनाने पर था। लेकिन अब यह अहसास कि खुद कॉकपिट भी असुरक्षित हो सकता है, पायलटों की पृष्ठभूमि की जांच को पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर सकता है। कॉकपिट में कैमरे भी लगाए जा सकते हैं। फिलहाल वहां केवल वॉइस रिकॉर्डर की व्यवस्था होती है। यात्रियों के रूप में आप पर भी कुछ और पाबंदियां बढ़ने की उम्मीद रखिए। लेकिन उड़ान भरते समय हमारी सुरक्षा के लिए यह एक छोटी-सी कीमत होगी। 9/11 के बाद तमाम सुरक्षा उपायों का मुख्य जोर कॉकपिट को सुरक्षित बनाने पर था। लेकिन अब यह अहसास कि खुद कॉकपिट भी असुरक्षित हो सकता है, पायलटों की पृष्ठभूमि की जांच को पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर सकता है। (ये लेखिका के अपने विचार हैं)