रुचिर शर्मा का कॉलम:तेज आर्थिक ग्रोथ अब चुनावी सफलता की गारंटी नहीं है
अमेरिकी राष्ट्रपतियों को अमूमन मिडटर्म चुनावों में नुकसान उठाना पड़ता है, लेकिन इस साल स्थिति असामान्य है। तीसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेजी से बढ़कर 4% के करीब पहुंच गई, फिर भी ट्रम्प की लोकप्रियता में तेज गिरावट आ रही है। उनकी पार्टी का जनसमर्थन तेजी से खिसक रहा है। अगर अगले महीने वे कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत खो देते हैं- जिसकी पूरी संभावना जताई जा रही है- तो 1950 के दशक के बाद यह पहला मौका होगा, जब अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद किसी सत्तारूढ़ राष्ट्रपति को ऐसी हार का सामना करना पड़ेगा। ऐसा क्यों हो रहा है? वास्तव में, बहुत-से अमेरिकियों को यह उछाल गलत किस्म की आर्थिक तेजी लगती है। ऐसी तेजी, जिसके साथ जीवन-यापन की लागत बढ़ रही है और जिसका लाभ मुख्यतः अमीर उपभोक्ताओं को मिल रहा है। आर्थिक वृद्धि का बड़ा हिस्सा एआई में भारी निवेश से भी आ रहा है। लेकिन मतदाताओं में इस तकनीकी को लेकर पहले की किसी भी तकनीकी क्रांति के मुकाबले कहीं ज्यादा अंदेशा है। ये सच है कि अर्थव्यवस्था को लेकर अमेरिकियों का असंतोष एआई और ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल, दोनों से पहले का है। कई दशकों से अमेरिकी अपने देश की स्थिति को लेकर लगातार अधिक असंतुष्ट होते गए हैं। लेकिन अमेरिका सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, ऐसा मानने वालों का अनुपात पिछले एक साल में 40% से गिरकर 20% रह गया है। इस निराशा की बड़ी वजह है- बढ़ती महंगाई और खर्च उठाने की मुश्किल। जीवन-यापन की लागत को सबसे अहम मुद्दा बताने वाले वोटरों का अनुपात छह गुना बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है- 25% से भी अधिक। यह स्पष्ट है कि लोगों में सबसे अधिक नाराजगी किन चीजों की कीमतों को लेकर है- घर और एनर्जी। ईरान युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जबकि एआई बिजली की मांग बढ़ा रहा है। पिछले एक साल में पेट्रोल की कीमतें 40% से अधिक बढ़ चुकी हैं और उपभोक्ता कीमतों में 3% से कहीं अधिक की दर से वृद्धि हो रही है। मॉर्गेज यानी होम लोन पर ब्याज दरें अब 7% से ऊपर पहुंच गई हैं। नतीजतन, अमेरिका में पिछले दो दशकों के किसी भी समय की तुलना में घर खरीदना अब अधिक मुश्किल हो गया है। व्यापक धारणा यह है कि बिजली की भारी खपत करने वाले डेटा सेंटरों के कारण बिजली-पानी जैसे बुनियादी उपयोगों के बिल बढ़ रहे हैं। हर दस में से नौ अमेरिकी नहीं चाहते कि उनके शहर में ऐसा कोई डेटा सेंटर बने और ऐसी अधिकांश परियोजनाओं को स्थानीय स्तर पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के लिए कांग्रेस के चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए इन चिंताओं का समाधान करना मुश्किल है, क्योंकि उनके अपने राष्ट्रपति का कहना है कि डेटा सेंटरों का निर्माण धीमा करने से अमेरिका पिछड़ा और गरीब हो जाएगा! इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि एआई डिजिटल युग का पहला ऐसा उत्पाद है, जिसे व्यापक स्तर पर नापसंद किया जा रहा है। पिछले दशकों में अमेरिकियों का स्पष्ट बहुमत कंप्यूटर और इंटरनेट को समाज के लिए बड़े लाभ के रूप में देखता आ रहा था। लेकिन अब अधिकांश लोग कहते हैं कि एआई को लेकर वे उत्साहित होने से अधिक चिंतित हैं। यह चिंता बीस की उम्र वाले युवाओं में सबसे तेजी से बढ़ रही है, जिन्हें भविष्य में नौकरियां न रहने का डर सता रहा है। ईरान युद्ध की कीमत के रूप में मतदाताओं से महंगी चीजें स्वीकार करने और चीन से आगे बने रहने की कीमत के रूप में एआई को अपनाने की अपील करके ट्रम्प अमेरिकियों के मौजूदा मूड के विरुद्ध खड़े हो रहे हैं। जीडीपी में तेज बढ़ोतरी भी अगर जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन में नहीं झलकती तो राजनीतिक रूप से उसका लाभ नहीं है। जनता का असंतोष कहीं सूक्ष्म आर्थिक पहलुओं से उपजता है। मसलन, महंगाई के असर को समायोजित करने के बाद वेतन-वृद्धि की दर हाल की कुछ तिमाहियों में नकारात्मक हो गई है। इसका प्रमुख अपवाद वे कर्मचारी हैं, जिनके पास एआई स्किल्स हैं। उन्हें अपने समकक्षों की तुलना में 120% तक अधिक वेतन मिल रहा है। यह असंतोष भड़काने के लिए काफी है। जीडीपी में तेज बढ़ोतरी भी अगर जमीनी स्तर पर लोगों के जीवन में नहीं झलकती तो राजनीतिक रूप से उसका कोई लाभ नहीं है। जनता का असंतोष कहीं सूक्ष्म आर्थिक पहलुओं से उपजता है। अमेरिका में ट्रम्प इसी का सामना कर रहे हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)