एन. रघुरामन का कॉलम:एआई सब कुछ देख सकता है, लेकिन क्या देखे हुए को समझ भी सकता है?

Oct 1, 2026 - 03:13 - 15:13  723
एन. रघुरामन का कॉलम:एआई सब कुछ देख सकता है, लेकिन क्या देखे हुए को समझ भी सकता है?
कुछ समय पहले ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली यवोन बेलगार्ड्‌ट को कार चलाते वक्त अजीब अनुभव हुआ। उनकी सास और उन्होंने सीट बेल्ट लगा रखी थी। चूंकि उनकी सास गाड़ी नहीं चला रही थीं, इसलिए उन्होंने नाक खुजा ली होगी- जैसा कि कोई भी स्किन इरिटेशन होने पर कर लेता है। उस पल में उनके हाथ से सीट बेल्ट का ऊपरी हिस्सा कवर हो गया। एआई-असिस्टेड कैमरे ने इस तस्वीर को ऐसा लिया, जैसे उन्होंने सीट बेल्ट ठीक-से नहीं पहनी है। बेलगार्ड्‌ट पर 1200 डॉलर का जुर्माना लगा और उनके लाइसेंस पर 4 डी-मेरिट पॉइंट रिफ्लेक्ट होने लगे। एक अन्य निवासी लिसा टेलर जब ड्राइव कर रही थीं तो एआई कैमरे ने उनकी 10 साल की बेटी की तस्वीर खींची, जिसने सीट बेल्ट बांह के नीचे कर रखी थी। टेलर ने कहा कि रुक-रुककर चल रहे ट्रैफिक में वह सड़क से नजरें नहीं हटा पा रही थीं, ताकि यह देख सकें कि उनकी बच्ची ने सीट बेल्ट कैसे लगा रखी है। इसी देश की एक और निवासी के साथ एक और मामला हुआ। मिली बार्टलेट पर तब भी जुर्माना लगा दिया गया, जब कैमरा फोटोग्राफ में दिख रहा था कि उन्होंने सीट बेल्ट सही-से पहन रखी है। तेज धूप के कारण ब्लैक एंड वाइट तस्वीर में सीट बेल्ट सफेद दिख रही थी और उनके कपड़ों में ही घुल-मिल गई। इन मामलों की बढ़ती संख्या बताती है कि इन्हें चंद तकनीकी गड़बड़ियों के जैसे नजरअंदाज करना मुश्किल है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में एआई कैमरे से पकड़े गए सीट बेल्ट उल्लंघन के मामलों में करीब 3000 ड्राइवरों ने पहले रिपोर्टिंग पीरियड में ही अपील की। और इनमें से करीब 60% अपील सफल रहीं। 2 मिलियन डॉलर से ज्यादा के जुर्माने वापस लिए गए। सितंबर तक ऐसे सैकड़ों और मामले भी खत्म कर दिए गए, जिनमें पुलिस प्रोसिक्यूटर्स ने माना कि कन्विक्शन की कोई उचित संभावना नहीं है। आप सोच रहे होंगे कि हमें यहां ऑस्ट्रेलिया के संदर्भ क्यों पढ़ने पड़ रहे हैं। क्योंकि अब भारत में भी यही होने लगा है। 15 सितंबर को सौविक दत्ता बेंगलुरु में अपनी पत्नी का स्कूटर चला रहे थे और उनकी पीठ पर गिटार बंधा हुआ था। ‘पीछे बैठी सवारी के हेलमेट नहीं पहनने’ के आरोप में दत्ता पर 500 रुपए का जुर्माना लगा दिया गया। चालान के साथ सबूत के तौर पर फोटो भी लगी थी, जो आउटर रिंग रोड से गुजरते समय ली गई थी। एआई कैमरे को लगा कि लंबा गिटार कोई सवारी है और उसने ट्रैफिक रूल्स के मुताबिक हेलमेट नहीं पहना है। जाहिर है, कैमरे ने गिटार को पीछे बैठी सवारी समझ लिया। दत्ता ने इस चालान को सोशल मीडिया पर शेयर किया। बेंगलुरु जैसे कई शहरों में एआई-मॉनिटर्ड कैमरे लग गए हैं, जहां जुर्माना लगाने के लिए इंसानी जांच नहीं होती। सोशल मीडिया पर बेलगावी जिले से जुड़ी एक घटना और शेयर हो रही है। इसमें कथित तौर पर एआई कैमरे द्वारा फोटो लिए जाने के बाद एक कार मालिक पर ‘हेलमेट नहीं पहनने’ के लिए 500 रुपए का जुर्माना कर दिया गया। कार मालिक ने अपनी प्रतिक्रिया में एक वीडियो बनाया, जिसमें वह हेलमेट पहनकर कार चला रहा है। मैंने ऐसे लोगों को देखा है, जिनकी ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी या पेट की सर्जरी हुई है और वे सीट बेल्ट को बांह के नीचे कर लेते हैं। सड़क पर खड़ा पुलिसकर्मी उन्हें रोकता है। लेकिन जब वे पट्टी दिखाते हैं तो उन्हें छोड़ दिया जाता है। कोई कैमरा गिटार की बिल्कुल सही तस्वीर ले सकता है। वह बिल्कुल सटीकता से बेल्ट, बांह या बच्चे पहचान सकता है। लेकिन संदर्भ को समझना डिटेक्शन से अलग बात है। कैमरा इंसानी दिमाग की तरह यह विश्लेषण करने में नाकाम रहा कि किसी राइडर के पीछे बंधी गिटार सवारी नहीं है, सर्जरी के बाद सीट बेल्ट को बांह के नीचे करना जानबूझकर किया गया उल्लंघन नहीं है, जरूरी नहीं कि नाक खुजा रहे यात्री ने सीट बेल्ट न लगाई हो और किसी बच्चे के बेल्ट को खिसकाने का मतलब स्वत: यह नहीं होता कि ड्राइवर ने जानबूझकर किसी उल्लंघन की अनुमति दी। ‘मैं क्या देख रहा हूं?’ इसका जबाव देने में तकनीक असाधारण रूप से अच्छी हो सकती है। लेकिन इस सवाल का जबाव देने में अब भी इंसानों की जरूरत है कि ‘असल में हुआ क्या था?’ फंडा यह है कि जो लोग सोचते हैं कि एआई उनकी नौकरी छीन लेगा, उनके लिए ऐसे उदाहरण इस तथ्य को और मजबूत करते हैं कि एआई इंसानी दखल के बिना काम नहीं कर सकता।