नितिन नवीन का कॉलम:2047 तक विकसित भारत का विराट संकल्प
बात वर्ष 2012 की है। मुझे गुजरात के आणंद जिले में आयोजित सद्भावना मिशन के एक कार्यक्रम में युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री के रूप में शामिल होने का अवसर मिला था। मैंने देखा कि जिले के लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और उनके क्रियान्वयन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष मेले का आयोजन किया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे दिन लोगों के बीच रहे। वे उनकी बातें सुनते, समस्याओं को समझते और समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते रहे। कार्यक्रम के बाद मैंने उनसे पूछा कि वे पूरे दिन स्वयं क्यों जुटे रहे। उन्होंने सहज भाव से कहा, ये लोग केवल अपनी समस्याओं के समाधान के लिए नहीं आते। उनका मुझसे आत्मीय संबंध है। उनकी भावनाएं मुझसे जुड़ी हैं। इसलिए परिवार के सदस्य के रूप में उनके साथ रहना मेरे लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनका यह उत्तर उस समय जितना सरल लगा, आज 25 वर्षों के उनके सार्वजनिक जीवन को देखते हुए उतना ही गहरा अर्थ लिए दिखता है। जनता से संवाद और उनकी समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी मानना उनकी महत्वपूर्ण विशेषता रही है। मोदी जी के सार्वजनिक जीवन की 25 वर्षों की यात्रा को यदि एक शब्द में व्यक्त करना हो, तो वह है- जनविश्वास। कालखंड वही अमर होते हैं, जो राष्ट्र के आत्मविश्वास को नई ऊर्जा और उसके सपनों को नई दिशा देते हैं। मोदी जी के शासन-दायित्व के 25 वर्ष ऐसी ही यात्रा के साक्षी हैं। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई यह यात्रा आज 25 वर्षों के पड़ाव को पूरा कर चुकी है। निराशा से उम्मीद, उम्मीद से भरोसा और भरोसे से संकल्प तक यह यात्रा केवल बदलते भारत ही नहीं, उस बढ़ते आत्मविश्वास की भी कहानी है, जिसने देश की आकांक्षाओं को नई दिशा और राष्ट्र के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान की। स्वतंत्रता से पहले देश के सामने एक स्पष्ट ध्येय था- भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करना। उस ध्येय ने भाषाओं, क्षेत्रों और वर्गों में बंटे समाज को एक सूत्र में बांधा और हर सामान्य व्यक्ति को योगदान का अवसर दिया। स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण के कार्य हुए, पर उतना स्पष्ट और साझा लक्ष्य कम ही दिखाई दिया। राष्ट्र को लक्ष्य इसलिए चाहिए कि लक्ष्य ही सामान्यजन की ऊर्जा को दिशा देता है। 2010 के आसपास देश में निराशा का वातावरण था- भ्रष्टाचार की खबरें, सुरक्षा को लेकर चिंता और व्यवस्था में भरोसे की कमी थी। इसी के बीच मोदी जी के नेतृत्व में बदलाव की उम्मीद जगी और देश नई दिशा की ओर बढ़ा। प्रधानमंत्री जी ने भारत के सामने एक बड़ा लक्ष्य रखने की बात की और यह कहा कि अब देश को छोटे सपने देखने की आवश्यकता नहीं, देश को बड़े सपने देखने चाहिए- 2047 तक विकसित भारत। आज यह 140 करोड़ देशवासियों का संकल्प बन चुका है, जिसमें विकास का अर्थ गांव, गरीब, किसान, महिला, युवा, आदिवासी और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में अवसरों का विस्तार हो। एक समय प्रश्न था, क्या भारत यह कर सकता है? आज प्रश्न है, भारत और क्या कर सकता है? यही उम्मीद से भरोसे की ओर बढ़ते भारत की कहानी है। मोदी जी के सार्वजनिक जीवन को समझने के लिए उनके संगठनात्मक संस्कारों को समझना जरूरी है। एक समर्पित स्वयंसेवक के रूप में काम करने से उनके भीतर यह भाव मजबूत हुआ कि सार्वजनिक जीवन का अर्थ पद नहीं, दायित्व है और राजनीति का अर्थ सत्ता नहीं, सेवा है। जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री का दायित्व संभाला, तब राज्य 2001 के विनाशकारी भूकंप के मलबे और आंसुओं से जूझ रहा था। भुज और कच्छ के पुनर्निर्माण की उस कठिन चुनौती को उन्होंने जिस इच्छाशक्ति से संभाला, उसने आगे चलकर विकास और आपदा-प्रबंधन के वैश्विक मॉडल का रूप लिया। इसी सेवा-संस्कार को उन्होंने 2014 के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सुशासन की रीढ़ बनाया। वित्तीय समावेशन, स्वच्छता, पोषण, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास हुआ। डीबीटी ने लाभार्थियों के हक की पाई-पाई सीधे उनके खाते में पहुंचाकर कल्याणकारी योजनाओं को भ्रष्टाचार-मुक्त, पारदर्शी और सशक्त बनाया है। 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। आज भारत केवल योजनाओं की घोषणाओं का देश नहीं है, बल्कि असंभव को संभव करने वाला राष्ट्र है। जिन गांवों को कभी सरकारी फाइलों में देश का आखिरी गांव कहा जाता था, मोदी जी ने उन्हें देश का प्रथम गांव बनाया। विकास तभी पूर्ण होता है, जब समाज का कोई व्यक्ति अपने अस्तित्व के कारण पीछे न छूटे। 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हमारी सामूहिक आकांक्षा और संकल्प है। एक प्रसिद्ध विचार है कि राजनेता अगले चुनाव के बारे में सोचता है, जबकि राष्ट्रनायक अगली पीढ़ी के बारे में। हमारी परंपरा में इसी दूरदृष्टि को राष्ट्र-निर्माण का आधार माना गया है। 25 वर्ष पहले एक स्वयंसेवक ने गुजरात में शासन की जिम्मेदारी संभाली थी। आज उसी यात्रा ने हमारे सामने 2047 के विकसित भारत का विराट संकल्प रखा है। अपने सपनों की दिशा में...