पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:किसी को सुनना हो तो धैर्य व शांति से रुककर सुनिए
कोई पशु कभी मनुष्य के लिए मनुष्य का विकल्प नहीं बना, सिवाय श्वान के। बाकी जानवर मनुष्य ने अपनी उपयोगिता के लिए अपने से जोड़े, पर श्वान ऐसा है, जिससे मनुष्य ने मनुष्य की पूर्ति कराई। क्योंकि सभी चाहते हैं कि मेरे सामने कोई दुम हिलाए, मेरा कहना माने। मेरा रक्षक भी हो, सेवक भी हो। इस काम में यह पशु बड़ा माहिर है। अपने सामने कोई दुम हिलाए, ये किसको पसंद नहीं है? इसीलिए मनुष्य की पशुओं के मामले में जो पसंद है, उसमें श्वान बड़ी ऊंचाई पर है। अब इसी मनोविज्ञान को पकड़ें कि आप भी किसी के प्रिय हो सकते हैं, पसंद हो सकते हैं। दुम मत हिलाइए, चापलूसी मत करिए, लेकिन किसी को जब भी सुनना हो तो बड़े धैर्य, शांति से रुककर सुनिए। प्रतिक्रिया देनी हो तो अवसर देखकर दें। आंखों से मुस्कराकर सामने वाले को उसका महत्व बताएं। आपकी टाइम शेयरिंग इतनी कैलकुलेटेड हो कि सामने वाला प्रोत्साहित हो जाए। श्वान भले ही पशु है पर एक बहुत बड़ी बात सिखाता है- आप दूसरों की पसंद कैसे बनें।