पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:हनुमान चालीसा पढ़ेंगे तो ईश्वर की शरणागति मिलेगी
भक्ति में शरणागति का बहुत महत्व है। हनुमान चालीसा शरणागति का मार्ग है। काकभुशुंडि जी ने श्रीराम जी से कहा था- भगत कल्पतरु प्रनत हित कृपा सिंधु सुखधाम, सोइ निज भगति मोहि प्रभु देहु दया करि राम। हे भक्तों के इच्छित फल देने वाले कल्पवृक्ष, हे शरणागति के हितकारी, कृपासागर सुखधाम राम जी, दया करके मुझे अपनी वही भक्ति दीजिए। यहां श्रीराम जी के लिए घोषणा की गई है कि वे शरणागत के हितकारी हैं और जो श्रीराम की शरण में गया, उसकी रक्षा होनी है। पिछले दिनों हवाई जहाज में स्मित मछार ने जिस तरह से हनुमान चालीसा को याद किया, वह इसी बात का प्रमाण है। जब हम हनुमान चालीसा पढ़ते हैं तो हमें ईश्वर की शरणागति मिलती है। फिर ईश्वर अपनी शक्ति का कवच हमें देता है और वहीं से हमारा साहस परिणाम ले लेता है। स्मित मछार ने हवाई-हनुमान का अवतार कराया है। हनुमान जी का यह रूप बड़ा अनूठा था। हमें समय रहते अपने बच्चों को हनुमान चालीसा से इसीलिए जोड़ना चाहिए कि उनके जीवन में जब ऐसी चुनौतियां आएं तो हनुमान चालीसा उनकी सहायक बने।