विराग गुप्ता का कॉलम:मस्क को हमारे स्पेस नेटवर्क व इंटरनेट में क्यों दिलचस्पी है?
मालूम होता है कि दुनिया के सबसे रईस व्यक्ति इलॉन मस्क के लिए मुनाफा ही सर्वोपरि है। वे सोशल मीडिया से प्रोपगंडा फैलाने के साथ ही चुनावी चंदों से सरकारी नीतियों को भी बदलने में माहिर हैं। सैटेलाइट से इंटरनेट देने वाले स्टारलिंक प्रोजेक्ट का लाइसेंस हासिल करने के लिए मस्क ने मोदी और अम्बानी पर तंज कसा। भारत में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल का ब्रॉडबैंड और फिक्स्ड-लाइन इंटरनेट बाजार में 80% अधिकार है। इससे जुड़े 6 पहलुओं को समझें : 1. लॉकडाउन करोड़ों लोगों के लिए आपदा, गरीबी और बेरोजगारी का दौर था। लेकिन उसी दरमियान मस्क की सम्पत्ति 10 गुना बढ़ी। 2020 के कोविड-वर्ष में ही भारत में अंतरिक्ष सेक्टर में खुली 5अर्थव्यवस्था और निजीकरण की शुरुआत हुई। सरकार और कानून को हल्के में लेते हुए मस्क की कम्पनी ने गैरकानूनी तरीके से 2021 में लाइसेंस के बिना ही भारत में सैटेलाइट इंटरनेट शुरू करने की कोशिश की थी, जिसे उन्हें बंद करना पड़ा। लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2. सुप्रीम कोर्ट के 2012 के फैसले के अनुसार राष्ट्रीय सम्पदा स्पेक्ट्रम का नीलामी के आधार पर आवंटन होना चाहिए। पर 2023 के दूरसंचार कानून से सैटेलाइट इंटरनेट के लिए नीलामी के बजाय प्रशासनिक आदेश से स्पेक्ट्रम आवंटन का रास्ता साफ हो गया। एयरटेल के वन-वेब को अप्रैल 2022, जियो को दिसम्बर 2022 में, जबकि स्टारलिंक को जून 2025 में अथॉराइजेशन मिला था। लेकिन सुरक्षा क्लीयरेंस के बाद ही इन्हें फाइनल लाइसेंस मिल सकेगा। तब मस्क भेदभाव का आरोप कैसे लगा सकते हैं? 3. पृथ्वी की निचली कक्षा में संचालित होने वाली सैटेलाइट सेवाओं पर नियंत्रण बड़ा मुद्दा है। संसदीय समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे के अनुसार 2013-14 में मनमोहन सरकार ने सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं से जुड़े खतरों के बारे में आगाह किया था। पूर्व राष्ट्रपति कलाम, इसरो और सेना ने गूगल के 3-डी व्यू को सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया था। लेकिन इसे आगे चलकर केंद्र सरकार से अनुमति मिल गई। 4. क्रिप्टो, एआई, डेटा सेंटर और सैटेलाइट इंटरनेट के कारोबार को सफल बनाने के लिए मस्क ने 2022 में ट्विटर (एक्स) को खरीदा। मस्क का ग्रोक एआई प्लेटफॉर्म गैर-कानूनी तरीके से एक्स के करोड़ों यूजर्स के डेटा का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहा है। नियमों के तहत एक्स ने शिकायत निवारण अधिकारी का विवरण भी जारी नहीं किया। ऐसे में सैटेलाइट इंटरनेट के सामरिक क्षेत्र में डेटा स्थानीयकरण और अन्य नियमों के पालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है? 5. मस्क कोई परोपकारी नहीं, उलटे विशुद्ध कारोबारी व्यक्ति हैं। भारत में घूस देना और लॉबीइंग गैर-कानूनी हैं, लेकिन मस्क डंके की चोट पर लॉबीइंग करते हैं। ट्रम्प और रिपब्लिकन पार्टी को 60 करोड़ डॉलर से ज्यादा चुनावी चंदा देने वाले मस्क ने टैक्स बचाने के लिए अपनी कम्पनी के हेडक्वार्टर को टेक्सस राज्य में शिफ्ट कर लिया था। कैपिटल गेन, विद होल्डिंग टैक्स और डिविडेंड पर टैक्स बचाने के लिए ही मस्क ने नीदरलैंड्स के टैक्स हैवन के माध्यम से भारत में निवेश की योजना बनाई है। 6. ईरान और यूक्रेन युद्ध के साथ बांग्लादेश के सीमावर्ती राज्यों में स्टारलिंक की भूमिका संदिग्ध रही है। 11 हजार दूरस्थ गांवों में इंटरनेट देने के नाम पर स्टारलिंक भारत के अंतरिक्ष और इंटरनेट नेटवर्क पर कब्जा करना चाह रही है। भारतीय उद्योगपतियों के एकाधिकार से जुड़े मस्क के आरोपों पर भारत में कानून के तहत ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। गृह और रक्षा मंत्रालय की आपत्ति और खुफिया एजेंसियों के अलर्ट को दरकिनार करके सैटेलाइट इंटरनेट को इजाजत देने से सामरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। 11 हजार गांवों में इंटरनेट देने के नाम पर स्टारलिंक भारत के अंतरिक्ष और इंटरनेट नेटवर्क पर कब्जा करना चाह रही है। खुफिया अलर्ट को दरकिनार कर सैटेलाइट इंटरनेट को इजाजत देने से सामरिक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)