एन. रघुरामन का कॉलम:हेल्दी एजिंग के लिए “बैलेंस डाइट’ से बेहतर है “हेल्दी डाइट’

Oct 24, 2026 - 08:00 - 08:00  150
एन. रघुरामन का कॉलम:हेल्दी एजिंग के लिए “बैलेंस डाइट’ से बेहतर है “हेल्दी डाइट’
हाल ही में ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ में अपने अपीयरेंस के दौरान करीना कपूर खान ने मजाकिया अंदाज में नाक-भौंहें सिकोड़ते हुए बताया कि पटौदी परिवार में अकसर लौकी पकाने की फरमाइश होती है। सैफ अली खान की ओर देखते हुए उन्होंने कहा कि ‘ये बहुत ज्यादा हेल्थ कॉन्शस फैमिली है।’ शो में इस कपल ने अपने घर की आदतों और खाने-पीने की एक-दूसरे से बिल्कुल अलग पसंद के बारे में खुलकर बात की और करीना ने मजाक में बताया कि उन्हें नॉनवेज ज्यादा पसंद है। उनकी यह हल्की-फुल्की बातचीत सोशल मीडिया की ट्रेंडिंग डिबेट बन गई। कुछ यूजर्स ने कहा कि करीना पहले एक फ्रेश प्रोड्यूस कंपनी की ब्रांड एंबेसडर रह चुकी हैं, जहां वे सार्वजनिक रूप से लौकी को ‘सुपरफूड सुपर-वेजिटेबल’ बताती थीं और दावा करती थीं कि उन्हें लौकी का सूप और सलाद पसंद है। मेरे एक फूड ग्रुप के मित्र- जिसे लौकी बहुत पसंद है- ने यह क्लिप फॉरवर्ड करते हुए कहा कि ‘रोजाना भोजन में लौकी खाने से बैलेंस डाइट मिलती है।’ लेकिन मैं एक बात हमेशा जोर देकर कहता रहा हूं कि कोई एक सब्जी बैलेंस फूड नहीं हो सकती। बैलेंस मील के लिए उचित कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और फैट होना जरूरी है। लौकी तो लगभग पूरी तरह पानी और फाइबर होती है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, हेल्दी डाइट चार बुनियादी सिद्धांतों पर टिकी होती है- पोषण की पर्याप्तता, संतुलन, सीमित मात्रा और विविधता। डब्ल्यूएचओ फ्रैमवर्क में बैलेंस का अर्थ है अपनी रोजाना की ऊर्जा जरूरतों के मुताबिक कैलोरी इनटेक को मैच करें और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फैट्स लें। हम आम तौर पर जिसे ‘बैलेंस डाइट’ मानते हैं, असल में उसका मतलब संतुलित आहार से कहीं ज्यादा है। इसका मतलब है कि आप अपनी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त भोजन लें और लंबे समय तक खाने में क्वालिटी, वैरायटी और अनुपात का भी ध्यान रखें। तो आपकी रोज की डाइट कितनी संतुलित है? ब्रोकली, ब्राउन राइस और योगर्ट निश्चित रूप से पौष्टिक हैं। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि रोजाना एक जैसे भोजन से आहार की विविधता सीमित हो जाती है। जाहिर है, कोई एक खाद्य पदार्थ हमारी सभी जरूरतें पूरी नहीं करता। विशेषज्ञ अधिकाधिक न्यूट्रिएंट्स पाने के लिए विभिन्न खाद्य समूहों में से कई तरह की चीजें खाने की सलाह देते हैं। कई लोग दूसरे पोषक तत्वों के बजाय प्रोटीन को प्राथमिकता देते हैं। आजकल प्रोटीन पर ज्यादा जोर देने के कारण दूसरे न्यूट्रिएंट फूड पीछे छूट सकते हैं। खासकर- साबुत अनाज, फल, दालें और नट एंड सीड्स। इनसे भरपूर फाइबर मिलता है, जो डाइजेशन और कार्डियो मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए अहम है। इनमें विटामिन, मिनरल और कई तरह के फाइटोकेमिकल्स भी भरपूर होते हैं, जो क्रॉनिक बीमारियों से बचाव में मददगार हैं। दूसरे स्रोतों से प्रोटीन कैसे बढ़ाएं? अगर आपके प्रोटीन का ज्यादातर हिस्सा डेयरी प्रोडक्ट्स, मीट और मछली से आता है तो खाने में बारी-बारी से छोले, ब्लैक बीन्स, राजमा, लेंटिस टोफू, सोयाबीन की फली, टेम्पेह और नट्स एंड सीड्स भी शामिल करें। इनमें से कई खाद्य पदार्थ फोलेट के अच्छे स्रोत हैं। साथ ही, इनमें ब्लड प्रेशर रेगुलेट करने वाले मैग्नीशियम और पोटेशियम भी होते हैं। अपनी खाने की प्लेट को ऐसा बनाइए कि वह हफ्ते में इंद्रधनुषी रंगों जैसी दिखे। विशेषज्ञ कहते हैं कि रंग-बिरंगी सब्जियां खाने की आदत डालें। विटामिन-सी के लिए गाजर, शकरकंद और लाल, पीली व हरी शिमला मिर्च खाएं। पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली और टमाटर भी खाएं। कुक्ड और सेमीकुक्ड रूप में इनका लुत्फ उठाएं। सब्जियां पकाने से कैल्शियम, आयरन, बीटा-कैरोटीन, ब्रेन-फ्रैंडली ल्यूटिन और लाइकोपीन शरीर में आसानी से अवशोषित होने लायक बन जाते हैं। अगर इन तमाम वैज्ञानिक व्याख्याओं से आपका सिर चकरा रहा है तो मेरे पास एक और बेहतर आइडिया है। अपने परिवार में 90 या 100 सालों तक जीने वाले पूर्वजों को याद कीजिए और उनकी ईटिंग हैबिट्स अपनाइए। सौ प्रतिशत वे सब्जियां और फल जरूर खाते होंगे, क्योंकि ये हेल्दी और बैलेंस डाइट की बुनियाद हैं। अपने भोजन का आधा हिस्सा इनसे बनाएंगे तो इनमें शरीर की जरूरत की हर चीज मिल जाएगी। फंडा यह है कि खाने का कोई एक हेल्दी और बैलेंस तरीका नहीं है। लेकिन ऑब्जर्वेशनल रिसर्च बताती हैं कि जो लोग हेल्दी और बैलेंस डाइट लेते हैं, उनके बिना किसी क्रॉनिक बीमारी के अधिक उम्र तक जीने की संभावना अधिक होती है। साथ ही उनकी शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक सेहत भी बेहतर रहती है।